बगहा (पश्चिमी चंपारण) : बगहा में अब बाघों की निगरानी 40 कैमरे से होगी.
वहीं बाघ को लेकर वन विभाग के अधिकारियों ने वन प्रमंडल दो के पांचों वन क्षेत्र के वनकर्मियों की
टीम को अलर्ट किया गया है. बता दें कि रिहायशी इलाकों में लगातार हो रहे बाघ के
हमले से परेशान लोगों ने मंगलवार को हर्नाटांड़ वन विभाग कार्यालय पर धरना प्रदर्शन दिया था.
जिसके बाद अब वन विभाग की टीम सतर्कता बरतनी शुरू कर दी है.
वन विभाग के द्वारा ग्रामीणों को जंगल के तरफ जाने से मना किया जा रहा है.
वीटीआर के हर्नाटांड़ वन क्षेत्र के बैरिया कला गांव के समीप जंगल से सटे इलाके में
दो दर्जनों वनकर्मियों की टीम कैम्प कर रही है.
बाघों की निगरानी: बैरिया कला गांव के पास कैंप कर रही वनकर्मी
हर्नाटांड़ वन क्षेत्र के रेंजर रमेश कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि मंगलवार की रात से ही
लगातार 24 घंटे वनकर्मियों की तीन टुकड़ी बैरिया कला गांव के पास कैम्प कर रही है.
जिसमें हरनाटांड़, चिउटाहां और वाल्मीकिनगर की 25 सदस्यीय टीम लगातार डे शिफ्ट में पेट्रोलिंग कर रही है.
इसके अलावे रात्रि में मदनपुर व गोनौली की टीम भी हरनाटांड़ वन क्षेत्र के वनकर्मियों के
साथ गश्ती दल में शामिल किया गया है.

वायरल हो रहा है बाघ का वीडियो
इधर लगातार हो रहे घटना के बाद बाघ का एक घुर्राते हुए वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.
कोई इसे आदमखोर बाघ बता रहा है, तो कोई मदनपुर वन क्षेत्र स्थिति टाइगर का वीडियो बता रहा है.
हालांकि यह वीडियो वाल्मिकी टाइगर रिजर्व की ही है.
लेकिन यही हमलावर बाघ है इसकी पुष्टि अधिकारी नहीं कर रहे हैं.
इधर इस वीडियो के बाद लोगों में बाघ से और डर व्याप्त हो गया है.
बाघों की निगरानी: बाघ का दिखा पग मार्क
रेंजर्स के नेतृत्व में वनकर्मी बाघ की निगरानी में जुटे हुए हैं.
निगरानी के क्रम में बाघ का पग मार्क देखने को मिला है.
बाघ के पगमार्क के अनुसार पता चल रहा है कि वो जंगल के करीब अपना ठिकाना बनाए हुए है.
वहीं लोगों की सुरक्षा के लिए रात्रि ड्यूटी में वन कर्मियों को लगाया गया है.
जो जंगल के किनारे आग जलाकर अपनी ड्यूटी करते नजर आ रहे हैं.
बाघ निगरानी के लिए लगाए गए 40 कैमरे
बाघ की निगरानी के लिए काफी पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं.
इसके लिए बैरिया कला गांव के सरेह से सटे जंगल के विभिन्न पेड़ों पर करीब 40 कैमरे लगाए जा रहे हैं.
ताकि बाघ की गतिविधियों के बारे में जानकारी मिल सके और ये चिन्हित किया जा सके कि कौन सा बाघ है.
वहीं दूसरी ओर ड्यूटी के दौरान वनकर्मियों को पटाखे भी उपलब्ध कराए गए हैं.
ताकि पटाखों की आवाज से बाघ गांव की ओर ना जाए.
रिपोर्ट: अनिल कुमार
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