बीएसएनएल को झारखंड-बिहार में भारी नुकसान, जनवरी-अक्टूबर में 3.10 लाख ग्राहक खोए। वहीं जियो ने 24.36 लाख और एयरटेल ने 5.75 लाख नए उपभोक्ता जोड़े।
BSNL Telecom Loss : झारखंड-बिहार टेलीकॉम सर्किल में भारत संचार निगम लिमिटेड बीएसएनएल के लिए वर्ष 2025 चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। जनवरी से अक्टूबर तक के 10 महीनों में बीएसएनएल ने कुल 3,10,385 मौजूदा उपभोक्ताओं को खो दिया है, यानी इतने ग्राहकों ने कंपनी की सेवा छोड़ दी। दूसरी ओर, इसी अवधि में बिहार सर्किल में कुल 28,55,296 नए मोबाइल उपभोक्ता जुड़े, जिनमें निजी कंपनियों का दबदबा रहा।
BSNL Telecom Loss: जियो की जबरदस्त बढ़त, कुल नए ग्राहकों में 85% हिस्सेदारी
टेलीकॉम क्षेत्र में सबसे अधिक बढ़त रिलायंस जियो ने दर्ज की है। कुल नए उपभोक्ताओं के आंकड़े में से जियो ने 24,36,771 नए ग्राहक जोड़े, जो कुल ग्रोथ का लगभग 85 प्रतिशत है। भारती एयरटेल भी इस वृद्धि में लाभान्वित हुआ और इस दौरान 5,75,934 उपभोक्ताओं को अपने नेटवर्क से जोड़ा। वोडा-आइडिया वीआई तीसरे स्थान पर रहा, जिसने 1,52,976 नए ग्राहक हासिल किए।
बीएसएनएल ने झारखंड-बिहार में 3,10,385 ग्राहक खोए
जनवरी-अक्टूबर में 28,55,296 नए मोबाइल ग्राहक जुड़े
रिलायंस जियो (JIO) ने 24,36,771 और एयरटेल ने 5,75,934 ग्राहक जोड़े
वीआई ने 1,52,976 नए उपभोक्ता अर्जित किए
बीएसएनएल की स्थिति सेवा गुणवत्ता और नेटवर्क समस्याओं के कारण कमजोर
BSNL Telecom Loss: बीएसएनएल क्यों पिछड़ रहा है
टेलीकॉम विशेषज्ञों का मानना है कि बीएसएनएल के ग्राहकों की संख्या में लगातार गिरावट का कारण सेवा गुणवत्ता से असंतोष और नेटवर्क समस्याएं हैं। कई उपभोक्ता मौजूदा प्लान और स्कीम को प्रतिस्पर्धी कंपनियों की तुलना में कम आकर्षक मानते हैं। यही कारण है कि कंपनी की बाजार स्थिति कमजोर होती दिख रही है।
BSNL Telecom Loss: टेली डेंसिटी में मामूली सुधार, फिर भी देश में सबसे नीचे
जनवरी से अक्टूबर 2025 के बीच बिहार सर्किल की टेली डेंसिटी 56.63 प्रतिशत से बढ़कर 58.18 प्रतिशत तक पहुंच गई। हालांकि यह सुधार सकारात्मक है, लेकिन बावजूद इसके यह सर्किल देश के सबसे कम टेली डेंसिटी वाले क्षेत्रों में शामिल बना हुआ है।
कुछ टेलीकॉम विश्लेषकों और उद्योग से जुड़े जानकारों के बीच यह राय भी चर्चा में रही है कि बीएसएनएल की गिरती बाजार हिस्सेदारी केवल सेवा गुणवत्ता या तकनीकी देरी तक सीमित नहीं है। आलोचकों का मानना है कि वर्षों तक चले नीतिगत फैसलों, निवेश में विलंब और रणनीतिक प्राथमिकताओं की कमी ने अप्रत्यक्ष रूप से निजी कंपनियों—विशेषकर जियो और एयरटेल—को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ पहुंचाया।
हालांकि इस तरह के दावे किसी आधिकारिक जांच या कानूनी निष्कर्ष से प्रमाणित नहीं हैं, फिर भी यह तर्क दिया जाता है कि यदि बीएसएनएल को समय पर आधुनिक नेटवर्क, पर्याप्त स्पेक्ट्रम और व्यावसायिक स्वतंत्रता मिली होती, तो वह आज ग्रामीण और अर्ध-शहरी भारत में निजी कंपनियों को कड़ी टक्कर देते हुए अग्रणी भूमिका में हो सकता था।
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