Garhwa : रंका में मुख्यमंत्री दाल-भात योजना में बड़ा गड़बड़ घोटाला उजागर

Garhwa : गढ़वा जिले के रंका अनुमंडल में आज एक बड़ा घोटाला उजागर हुआ है। यह घोटाला मुख्यमंत्री दाल-भात योजना से जुड़ा हुआ है, जिसका उद्देश्य गरीब और असहाय लोगों को नाममात्र की कीमत पर भोजन उपलब्ध कराना है। लेकिन निरीक्षण के दौरान यह सामने आया कि जिस योजना से गरीबों का पेट भरना था, उसका अनाज ही अधिकारियों और पदाधिकारियों के घरों में जमा किया जा रहा था।

गुरुवार को अपराह्न लगभग 2:30 बजे गढ़वा उपायुक्त दिनेश कुमार यादव के निर्देश पर रंका अनुमंडल पदाधिकारी रुद्र प्रताप ने दाल-भात केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के समय केंद्र पूरी तरह से बंद पाया गया। सबसे गंभीर बात यह रही कि केंद्र से संबंधित कोई भी रजिस्टर, पंजी या उपभोक्ता सूची उपलब्ध नहीं कराई जा सकी।

Garhwa : बंद मिला दाल-भात केंद्र

निरीक्षण के दौरान जब पदाधिकारी केंद्र पहुंचे तो वहां ताला जड़ा हुआ था। जांच की गहराई में जाने पर कई चौकाने वाले तथ्य सामने आए। मुख्यमंत्री दाल-भात योजना का भंडार पंजी, उपभोग पंजी और उपभोक्ताओं के नामों की सूची बिल्कुल भी उपलब्ध नहीं थी। केवल एक रजिस्टर दिखाया गया जिसमें मात्र 214 लोगों का नाम दर्ज था, लेकिन उसमें किसी भी पदाधिकारी का हस्ताक्षर, दिनांक या सरकारी बोर्ड की मुहर नहीं थी। यह स्पष्ट संकेत था कि रजिस्टर महज दिखावे के लिए तैयार किया गया है।

Garhwa : घरों से बरामद हुआ सरकारी अनाज

निरीक्षण के क्रम में सबसे चौंकाने वाली बात तब सामने आई जब केंद्र संचालित करने वाले पदाधिकारियों के घरों से सरकारी अनाज बरामद किया गया। केंद्र की उपाध्यक्ष कुंती देवी के घर से 90 किलोग्राम चावल बरामद किए गए।सचिव मीना देवी के घर से 30 किलोग्राम चावल, 4 किलोग्राम चना और 3 किलोग्राम सोयाबीन बरामद किया गया।

यही नहीं, बचा हुआ सोयाबीन सचिव मीना देवी ने अपने घर की गाय को खिला दिया था। यह घटना योजना की वास्तविकता को उजागर करती है कि गरीबों के लिए आने वाला अनाज घरों में संग्रहित कर लिया जाता था और पशुओं को खिला दिया जाता था।

Garhwa : हर माह उठाव, गरीब तक पहुंच नहीं

जांच में यह भी सामने आया कि केंद्र संचालकों द्वारा हर महीने सरकार से मिलने वाला पूरा अनाज उठाव कर लिया जाता था। जानकारी के अनुसार हर महीने केंद्र को 12 क्विंटल चावल, 75 किलो चना दाल और 2 बोरा सोयाबीन दिया जाता है। लेकिन गरीब उपभोक्ताओं तक इसका लाभ पहुंचने के बजाय यह अनाज घरों में संग्रह कर लिया जाता था।

इस योजना का मूल उद्देश्य था कि गरीब और असहाय लोग महज पांच रुपये में भरपेट भोजन कर सकें। लेकिन रंका में इस योजना की हकीकत कुछ और ही थी। यहां गरीबों को मिलने वाले चावल, दाल और सोयाबीन का अधिकांश हिस्सा पदाधिकारियों द्वारा हड़प लिया जाता था।

गंभीर वित्तीय घोटाले की आशंका

निरीक्षण के बाद अनुमंडल पदाधिकारी रुद्र प्रताप ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है और इसमें बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताओं की आशंका है। उन्होंने कहा कि पूरे प्रकरण की विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर जिला उपायुक्त को भेजी जाएगी ताकि दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सके।

एसडीओ ने यह भी कहा कि जब प्रखंड कार्यालय के कैंपस के अंदर ही इस तरह का बड़ा घोटाला हो रहा है, तो प्रखंड के अन्य इलाकों में चल रहे दाल-भात केंद्रों की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है। सवाल यह उठता है कि जब नाक के नीचे ही सरकारी योजना की धज्जियां उड़ाई जा रही हैं तो फिर दूरस्थ गांवों में कितनी पारदर्शिता बरती जा रही होगी।

गरीबों के हिस्से का खाना गाय खा रही

इस पूरे घोटाले ने व्यवस्था की पोल खोल दी है। गरीबों को भरपेट भोजन देने के लिए शुरू की गई योजना में गरीब तो भूखे पेट रह गए और उनके हिस्से का अनाज पशुओं को खिला दिया गया। यह स्थिति न केवल सरकारी उदासीनता को दर्शाती है, बल्कि योजना के संचालन में गहरे पैठे भ्रष्टाचार की ओर भी इशारा करती है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि दाल-भात केंद्र अक्सर बंद ही रहता था। कई बार जब वे केंद्र पहुंचे तो वहां ताला लटकता मिला। कभी-कभी खुला भी तो भोजन की गुणवत्ता बेहद खराब होती थी और अनाज की मात्रा भी पर्याप्त नहीं दी जाती थी। अब जब अधिकारियों ने निरीक्षण किया तो सारा मामला सामने आ गया।

आगे की कार्रवाई

अनुमंडल पदाधिकारी ने साफ कहा कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। पूरे प्रकरण की जांच रिपोर्ट उपायुक्त को भेज दी जाएगी और दोषियों पर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही जिले के सभी दाल-भात केंद्रों की विशेष जांच कराने की भी मांग की जा रही है ताकि इस योजना का वास्तविक लाभ गरीब और जरूरतमंद लोगों को मिल सके।

योजना पर उठ रहे सवाल

मुख्यमंत्री दाल-भात योजना गरीबों के लिए संजीवनी की तरह थी। इसका उद्देश्य था कि कोई भी गरीब भूखा न सोए। लेकिन रंका की इस घटना ने योजना की साख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जब केंद्र संचालक ही गरीबों के हिस्से का अनाज अपने घर ले जाकर जमा करेंगे तो योजना का मकसद ही विफल हो जाएगा।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस पूरे घोटाले की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों को जेल भेजा जाए और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर रोक लगाने के लिए कड़ी निगरानी व्यवस्था की जाए।

रंका में मुख्यमंत्री दाल-भात योजना में हुआ यह घोटाला न केवल भ्रष्टाचार की जड़ें उजागर करता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि किस तरह गरीबों की थाली से निवाला छीनकर निजी स्वार्थ साधा जा रहा है। अगर समय रहते इस पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो इस योजना का वास्तविक उद्देश्य पूरी तरह से विफल हो जाएगा।

आकाश कुमार की रिपोर्ट–

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