राज्य के सभी मेडिकल स्टोर्स पर QR कोड और टोल-फ्री नंबर 1800-180-3024 लगाना अनिवार्य किया गया है. अब शिकायत और निगरानी की प्रक्रिया और आसान होगी.
रांची: केंद्र सरकार की बड़ी पहल के तहत अब पूरे राज्य में संचालित सभी Medical Stores के बाहर टोल-फ्री नंबर 1800-180-3024 और QR Code लगाना अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने 20 नवंबर को यह आदेश देशभर के राज्यों को भेजा था, जिसके बाद राज्य औषधि निदेशालय ने सभी ड्रग इंस्पेक्टर्स को इस संबंध में निर्देश जारी कर दिए हैं।
निर्देशों के अनुसार अब हर ड्रग इंस्पेक्टर को अपने क्षेत्र में मौजूद मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण करना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि Medical Stores के प्रवेश द्वार पर QR कोड और टोल-फ्री नंबर साफ-साफ चस्पां हों। विभाग ने झारखंड ड्रग एंड केमिस्ट एसोसिएशन से भी कहा है कि वे अपने स्तर पर दवा दुकानदारों को इस नियम के बारे में जागरूक करें ताकि आदेश का क्रियान्वयन सहज रूप से हो सके।
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सभी मेडिकल स्टोर्स के बाहर QR Code और Toll-Free Number 1800-180-3024 लगाना अब अनिवार्य.
केंद्र सरकार के आदेश पर राज्य औषधि निदेशालय ने ड्रग इंस्पेक्टर्स को निगरानी का निर्देश दिया.
दवा के प्रतिकूल प्रभाव या शिकायत अब QR Code Scan या Toll-Free नंबर के जरिए दर्ज की जा सकेगी.
दवा की गुणवत्ता की निगरानी के लिए Indian Pharmacopoeia Commission ने स्वदेशी सॉफ्टवेयर तैयार किया.
झारखंड में 18,000 से अधिक मेडिकल स्टोर्स पर आदेश का पालन अनिवार्य.
सरकार का यह कदम दवाओं की गुणवत्ता और उपभोक्ता सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए आदेश के तहत अगर किसी व्यक्ति को दवा लेने के बाद कोई प्रतिकूल प्रतिक्रिया या समस्या होती है, तो वह तुरंत टोल-फ्री नंबर 1800-180-3024 पर विस्तृत जानकारी दे सकता है। वहीं QR कोड स्कैन करके भी शिकायत दर्ज की जा सकती है, जिससे रिपोर्ट सीधे सिस्टम पर पहुंच जाएगी।
भारतीय फार्माकोपिया आयोग द्वारा हाल ही में तैयार किए गए एक स्वदेशी सॉफ्टवेयर के जरिए दवाओं के सेवन के बाद होने वाले प्रतिकूल प्रभावों और उनके प्रबंधन पर तकनीकी निगरानी रखी जाएगी। इससे दवा सुरक्षा संबंधी डेटा तेजी से एकत्र होगा और समय रहते कार्रवाई सुनिश्चित हो सकेगी।
राज्य में वर्तमान में थोक और खुदरा मिलाकर 18,000 से अधिक मेडिकल स्टोर्स संचालित हो रहे हैं। अब सभी को केंद्र सरकार द्वारा जारी इस आदेश का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि इससे दवाओं की गुणवत्ता की निगरानी मजबूत होगी और उपभोक्ताओं को सही समय पर शिकायत दर्ज करने का बेहतर विकल्प मिलेगा।
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