अभियंताओं के कौशल को उन्नत कर बेहतर जल प्रबंधन के लिए राज्य स्तरीय दो दिवसीय कार्याशाला का हुआ आयोजन

Patna: लघु जल संसाधन विभाग के तत्वावधान में मंगलवार को जल भवन, पटना में ‘ग्राउंड वाटर मैनेजमेंट एंड सस्टेनेबल इरिगेशन प्रैक्टिस’ विषय पर राज्य स्तरीय दो दिवसीय कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। कार्यशाला का उद्घाटन विभाग के सचिव श्री बी. कार्तिकेय धनजी, अपर सचिव श्रीमती संगीता सिंह, अभियंता प्रमुख श्री सुनील कुमार सहित अन्य वरीय अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया।

इस अवसर पर सचिव बी. कार्तिकेय धनजी ने अपने संबोधन में कहा कि राज्य सरकार का स्पष्ट लक्ष्य है कि हर खेत के अंतिम छोर तक पानी उपलब्ध कराया जाए, जिससे फसल उत्पादन बेहतर हो सके एवं किसानों की आय में सतत वृद्धि सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि विभाग द्वारा संचालित विभिन्न योजनाओं का उद्देश्य केवल संरचनाओं का निर्माण नहीं, बल्कि किसानों के जीवन स्तर में ठोस सुधार लाना है।

सचिव ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि योजनाओं को गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए स्पष्ट विजन, सुदृढ़ योजना निर्माण एवं प्रभावी निगरानी अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अभियंताओं की भूमिका इसमें सबसे महत्वपूर्ण है, इसलिए उनके तकनीकी एवं प्रबंधकीय कौशल का निरंतर उन्नयन किया जाना चाहिए। इसी उद्देश्य से इस कार्यशाला का आयोजन किया गया है, ताकि अभियंताओं को नवीनतम तकनीकों, आधुनिक सिंचाई पद्धतियों एवं नवाचारों से अवगत कराया जा सके। भविष्य में भी ऐसी कार्यशाला का आयोजन किया जाता रहेगा।

उन्होंने कहा कि विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों एवं अकादमिक संस्थानों के सहयोग से अभियंताओं को नवाचार आधारित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है, जिससे वे अपने कार्यक्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन कर सकें और योजनाओं को अधिक प्रभावी एवं परिणामोन्मुख बना सकें।

सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि कार्यशाला के दौरान अभियंता अपने क्षेत्रीय अनुभवों को साझा करें तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाइयों पर खुलकर चर्चा करें। उन्होंने कहा कि समस्याओं की सही पहचान और सामूहिक समाधान से ही योजनाओं के उद्देश्यों की प्राप्ति संभव है तथा उनका बेहतर क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पहले किसान काफी हद तक मॉनसून पर निर्भर रहते थे, लेकिन सरकार के प्रयासों से अब यह निर्भरता धीरे-धीरे कम हो रही है और वर्षभर सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में प्रगति हुई है।

सचिव ने जल संसाधनों की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कहा कि तालाब, पोखर एवं अन्य जल निकाय हमारे लिए अमूल्य धरोहर हैं। इनके संरक्षण एवं समुचित उपयोग से न केवल सिंचाई बल्कि मत्स्य पालन जैसे अन्य आय के स्रोतों को भी बढ़ावा मिलता है। उन्होंने जल प्रबंधन के ऐतिहासिक उदाहरणों का उल्लेख करते हुए समग्र जल प्रबंधन की आवश्यकता पर बल दिया।

उन्होंने बताया कि राज्य के सभी जिलों में योजनाओं के चयन हेतु सर्वेक्षण किया गया है, जिसके तहत लगभग 6500 योजनाएं चिन्हित की गई हैं। इनमें से वित्तीय वर्ष 2025-26 में लगभग 1300 योजनाएं पूर्ण कर ली गई हैं, तथा आगामी पांच वर्षों में निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप सभी योजनाओं को पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। कार्यशाला के दौरान भूजल आकलन, कृत्रिम पुनर्भरण तकनीक, जल-संरक्षण के उपाय, जल उपयोग दक्षता, डेटा आधारित योजना निर्माण, सतत भूजल प्रबंधन एव सतत सिंचाई पद्धि सहित कई महत्वपूर्ण विषयों पर विशेषज्ञों द्वारा विस्तृत चर्चा एवं तकनीकी अनुभव साझा किया गया।

इस अवसर पर मुख्य अभियंता सुनील कुमार ने आगत अतिथियों का स्वागत किया एवं कार्यशाला की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में संयुक्त सचिव, विभिन्न वैज्ञानिक, राज्यभर से आए अभियंता सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे।

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