रांची: झारखंड हाइकोर्ट ने एनडीपीएस से जुड़े एक मामले में आरोपी बिरसा मुंडा की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई की.
इस दौरान सीआइडी डीजी अनुराग गुप्ता सशरीर उपस्थित हुए, कोर्ट ने कहा कि ट्रायल के दौरान गवाह सरकारी कर्मी अपने पूर्व के बयान से कैसे मुकर (होस्टाइल हो गया) गया.
उनसे जानना चाहा कि इस तरह के मामले में क्या कोई कार्रवाई हुई है. इस पर सीआइडी डीजी ने स्पष्ट किया कि गवाही में मुकरनेवाले सरकारी कर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की अनुशंसा की जायेगी.
जवाब सुनने के बाद कोर्ट ने मामले में जल्द ट्रायल पूरा करने का निर्देश दिया, साथ ही जमानत याचिका खारिज कर दी. इससे पूर्व बताया गया कि प्रार्थी मजदूर गाड़ी से सामान उतारने और चढ़ाने का काम करता है.
दशम फॉल की पुलिस ने नशीले पदार्थ के संदेह में छापेमारी कर उसे पकड़ा था. वाहन से 1640 किलो डोडा बरामद हुआ था. मामले को लेकर दशम फॉल थाना में कांड संख्या-13/2021 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गयी थी. उल्लेखनीय है कि प्रार्थी बिरसा मुंडा ने जतानत याचिका दायर की थी.
कहा था कि रांची की निचली अदालत में गवाही के दौरान बचाव पक्ष ने जब दशम फॉल के चौकीदार से पूछा तो उसने कहा कि उस दिन वह ड्यूटी पर नहीं था.
वह छुट्टी पर था, जबकि प्राथमिकी के अनुसार सीजर लिस्ट तैयार किया गया था, उसमें उस चौकीदार का नाम था. पिछली सुनवाई में कोर्ट ने सरकारी कर्मचारी द्वारा गवाही के दौरान मुकरने को गंभीरता से लेते हुए सीआइडी डीजी को उपस्थित होने का निर्देश दिया था.




