BIG BREAKING : अब बच्चों को लगेगी वैक्सीन, DGCI ने दी मंजूरी

2 से 18 वर्ष के बच्चों को लगाए जाएंगे टीका

नई दिल्ली : कोरोना के तीसरी लहर की आशंका के बीच एक बड़ी राहत भरी खबर आई है. अब दो वर्ष से 18 साल के बच्चों को कोवैक्सीन का टीका लगाया जा सकेगा. भारत बायोटेक और आईसीएसआर ने मिलकर टीका तैयार किया है. लंबे समय से चल रहे ट्राइल के बाद मंगलवार को DGCI ने मंजूरी दे दी है. जानकारी के अनुसार 28 दिन के अंतराल पर बच्चों को कोरोना वैक्सीन के दो टीके लगाए जाएंगे. DGCI ने भारत बायोटेक कंपनी की कोरोना वैक्सीन को मंजूरी दी है. सरकार की तरफ से इस वैक्सीन को लेकर जल्द ही गाइडलाइन जारी की जाएगी.

जानकारी के मुताबिक भारत बायोटेक की वैक्सीन 12 से 17 साल तक के बच्चों को दी जाएगी. गौरतलब है कि भारत बायोटेक भारत की पहली ऐसी कंपनी है जिसने बच्चों के लिए वैक्सीन पर ट्रायल किया था. दिल्ली के एम्स में इसका ट्रायल हुआ था जिसके बाद कंपनी ने रिपोर्ट को सबमिट किया था.

भारत बायोटेक ने किया था पहला ट्रायल

गौरतलब है कि भारत बायोटेक भारत की पहली कंपनी है, जिसने बच्चों के लिए कोरोना वैक्सीन पर ट्रायल किया था. देश में इस वैक्सीन का ट्रायल दिल्ली स्थित एम्स में हुआ था, जिसके बाद कंपनी ने रिपोर्ट सौंप दी. स्वास्थ्य मंत्रालय ने रिपोर्ट के आधार पर इस वैक्सीन को मंजूरी दी है. एक हफ्ते पहले भारत बायोटेक ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों में उपयोग के लिए Covid-19 वैक्सीन कोवैक्सीन के दूसरे चरण का परीक्षण पूरा किया और इसके सत्यापन और आपातकालीन उपयोग की मंजूरी के लिए डेटा केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन द्वारा प्रस्तुत किया गया है.

ऐसे बच्चों को पहले लग सकती है वैक्सीन

  • बहुत छोटे बच्चों में कोरोना संक्रमण का असर कम देखा गया है. ज्यों-ज्यों उम्र बढ़ती जाती है, रिस्क बढ़ता है. खासकर 12 से 18 साल के उम्रवर्ग के बच्चों में रिस्क ज्यादा देखा गया है इसलिए इस उम्र के बच्चों को पहले टीका लग सकता है.
  • जो बच्चे कोमॉर्बिडिटी के शिकार हैं, यानी जिन्हें डायबिटीज या ऑटो इम्यून की बीमारी है, स्टेरॉयड पर हैं, कैंसर है या मोटापे के शिकार हैं, वे हाई रिस्क में आते हैं. अगर किसी बच्चे की उम्र 15 साल है, लेकिन वजन 80 किलो है तो ऐसे बच्चे ज्यादा रिस्क में हैं. इसलिए ऐसे ग्रुप को पहले वैक्सीन लग सकती है.
  • बच्चों में भी जो मोटापे के शिकार थे, उन्हें ज्यादा परेशानी हो सकती है. दिल्ली में स्कूल जाने वाले बच्चों में लगभग 20 पर्सेंट मोटापे के शिकार हैं. ऐसे बच्चों को पहले वैक्सीन लग सकती है.
  • जो बच्चे पहले से बीमार हैं, तो उनकी बीमारी के आधार पर देखा जाएगा कि उन्हें टीका लग सकता है या नहीं, ऐसे बच्चों को प्राथमिकता मिल सकती है.

ऐसे शुरू हुआ ट्रायल

दुनिया के कई देशों जैसे अमेरिका, सिंगापुर और कुछ यूरोपीय देशों में 12 साल से ऊपर के बच्चों के लिए वैक्सीन का क्लिनिकल ट्रायल 2020 के अंत में शुरू हुआ था. भारत बायोटेक ने जुलाई में बच्चों के लिए वैक्सीन तैयार करने के लिए क्लिनिकल ट्रायल शुरू किया. इसी तरह जायडस कैडिला ने भी 12 से 18 साल के बच्चों पर वैक्सीन का ट्रायल जुलाई में ही शुरू किया. इसी महीने की शुरुआत में ट्रायल का डेटा ड्रग रेग्युलेटर के पास भेजा था.

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