Political Message : उदयभान करवरिया की रिहाई के यूपी की सियासत में हैं बड़े गूढ़ मायने

प्रयागराज :  Political Messageउदयभान करवरिया की रिहाई के यूपी की सियासत में हैं बड़े गूढ़ मायने। बृहस्पतिवार सुबह प्रयागराज के नैनी सेंट्रल जेल से अपने अच्छे आचरण के चलते उम्र कैद कैद के सजायाफ्ता बाहुबली पूर्व विधायक उदयभान करवरिया की रिहाई हो गई। इस रिहाई के होते ही यूपी की सियासत में नई हलचल देखने को मिली। कभी भाजपा के संस्थापक त्रयी राजनेताओँ में से एक अन्यतम डॉ. मुरली मनोहर जोशी के करीबी रहे इस पूर्व भाजपा विधायक की समय से पहले हुई रिहाई को प्रयागराज मंडल में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के समीकरण से जोड़ कर देखा जा रहा है कि भाजपा में सीएम योगी आदित्यनाथ के खिलाफ जारी अंदरखाने की किलेबंदी को दुरुस्त कर लिया जाएगा।

प्रयागराज मंडल में भाजपा के अहम चेहरा रहे हैं पूर्व विधायक उदयभान करवरिया

एक दौर में मुरली मनोहर जोशी का दाहिना हाथ कहे जाने वाले उदयभान करवरिया की समय से पहले रिहाई ने प्रयागराज मंडल के राजनीतिक समीकरण को बदल दिया है। करवरिया के प्रभाव वाले इलाके में भारतीय जनता पार्टी की हार और अचानक से उदयभान की रिहाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं सियासी फिजां में तैर रही हैं। इस रिहाई से प्रयागराज मंडल में भाजपा को संजीवनी सी मिल गई है और साथ ही वर्चस्व की लड़ाई की शुरुआत भी। मौजूदा समय में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य के ईद-गिर्द ही प्रयागराज मंडल की सियासत घूमती है। केशव प्रसाद मौर्य और उदयभान करवरिया के बीच कोई अदावत नहीं है, लेकिन उदयभान करवरिया का जेल से बाहर आने का मतलब केशव प्रसाद मौर्य के सामने एक लकीर को खींच देने जैसा है। माना जा रहा है कि उदयभान के जरिए सूबे के सबसे ताकतवर शख्स ने केशव प्रसाद मौर्य की उनके ही घर में घेराबंदी कर दी है। भाजपा के टिकट पर बारा विधानसभा सीट से दो बार विधायक रहे उदयभान की गिनती प्रयागराज मंडल के सबसे बड़े ब्राह्मण चेहरे के रूप में होती है। जेल जाने से पहले तक उदयभान ही प्रयागराज मंडल में भाजपा के संगठन को परोक्ष या अपरोक्ष रूप से संभालते थे।

उदयभान के चुनावी प्रबंधन का लोहा मानते थे मुरली मनोहर जोशी

गत लोकसभा चुनाव में मिली हार, प्रयागराज मंडल में कमजोर होते संगठन और ब्राह्मण वोटरों के रूठने की वजह से भाजपा नेतृत्व चिंता में है। अब उसकी उम्मीद उदयभान करविरया से है। उनके संगठन कौशल का लोहा भाजपा के सीनियर नेता मुरली मनोहर जोशी भी मानते थे। यही वजह रही कि मुरली मनोहर जोशी अपने लोकसभा चुनाव की कमान भी उदयभान को सौंप दिया करते थे। क्षेत्र में उदयभान करवरिया ही वह भाजपा नेता थे, जो रेवती रमण सिंह के खिलाफ धनबल और बाहुबल के साथ सियासी नूराकुश्ती करते थे। अब रेवती रमण सिंह के बेटे उज्ज्वल रमण सिंह प्रयागराज से सांसद बन गए हैं तो भाजपा उदयभान के जरिए अभी से ही वर्ष 2027 के गणित दुरुस्त करने में जुटना चाहती है। वैसे तो उदयभान करवरिया पिछले कई दशक से प्रयागराज की राजनीति के मंझे हुए खिलाड़ी माने जाते हैं, लेकिन उनकी जड़ कौशांबी से भी जुड़ी हुई है। कौशांबी में अभी भी उदयभान करवरिया के करीबी का सिक्का चलता है और ब्राह्मण वोटरों पर पकड़ मजबूत है। यही वजह है कि भाजपा उदयभान के जरिए उस कौशांबी जिले के सारे समीकरण दुरुस्त करना चाह रही है जहां पर विधानसभा में तीनों सीटें और लोकसभा की सीट भाजपा हार गई थी।

नैनी जेल से रिहा होने पर परिजनों से मिलते उदयभान करवरिया
नैनी जेल से रिहा होने पर परिजनों से मिलते उदयभान करवरिया

 

रिहाई के बाद भी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे उदयभान, संभालेंगे सांगठनिक कमान

उदयभान करवरिया भले ही जेल से रिहा कर दिए गए हों, लेकिन वह चुनाव नहीं लड़ सकते हैं। ऐसे में अब उनकी भूमिका संगठन में भाजपा नेतृत्व को दिख रही है। भाजपा नेतृत्व उन्हें एक बार फिर संगठन में लौटाने और पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं को 2027 की लड़ाई के लिए तैयार करने में जुटाने की तैयारी में है। फिलहाल प्रयागराज मंडल का भाजपा संगठन भी काफी कमजोर है, जिसकी तस्दीक चुनाव हारने वाले सभी नेताओं ने पार्टी हाईकमान से की थी। गत लोकसभा चुनाव में हार के बाद जब भाजपा ने समीक्षा शुरू की तो उसे पता चला कि प्रयागराज में संगठन कई गुटों में बंट चुका है। खासतौर पर ब्राह्मण नेताओं ने कई गुट बना लिए हैं जिसमें शुक्ला गुट, पांडेय गुट और ओझा गुट के नाम सामने आए हैं। इन सबकी काट के लिए भाजपा के पास उदयभान करवरिया ही एक मजबूत विकल्प हैं और उनकी ब्राह्मण वोटरों में पकड़ भी है और साथ ही जेल जाने के कारण एक सहानुभूति भी।

उदयभान अब बेटे को सियासत में उतारने के मूड में

उदयभान करवरिया जब जेल गए तो उनकी सियासी विरासत को पत्नी नीलम करवरिया ने संभाला था। वर्ष। 2017 में मेजा विधानसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर नीलम करवरिया विधायक बनी थीं। लेकिन वर्ष 2022 का चुनाव वह हार गईं। उसके बाद से नीलम करवरिया काफी बीमार हैं और ऐसे में अंदरखाने की खबर है कि उदयभान करवरिया अपने बेटे सक्षम करवरिया को सियासत में लाने की तैयारी में हैं। दो बार विधायक रहे उदयभान करवरिया के परिवार का सियासी रसूख काफी बड़ा है। वर्ष 2002 और 2007 के चुनाव में उदयभान करवरिया बारा सीट से चुनाव जीते थे, जबकि वर्ष 2009 में उनके बड़े भाई कपिलमुनि करवरिया प्रयागराज के सांसद बने थे। हालांकि कपिलमुनि बसपा के टिकट पर जीते थे और उदयभान के छोटे भाई सूरजभान करवरिया एमएलसी रहे हैं। उनके कई रिश्तेदार भी राजनीति में हैं।

सपा विधायक जवाहर यादव की हत्या में हुई थी उदयभान को आजीवन कारावास

साल 1996 में झूंसी से समाजवादी पार्टी (सपा) के विधायक रहे जवाहर यादव उर्फ जवाहर पंडित की हत्या कर दी गई थी। जवाहर के साथ ही उनके ड्राइवर और एक राहगीर की 13 अगस्त 1996 में सिविल लाइंस क्षेत्र में एके-47 से गोली मार कर हत्या की गई थी। तब वह पहला मौका था जब प्रयागराज में एक-47 तड़तड़ाई थी। उस तिहरे हत्याकांड का आरोप उदयभान, उनके भाइयो कपिलमुनि और सूरजभान व रिश्तेदार रामचंद्र पर लगा था। हत्याकांड के 6 साल बाद उदयभान विधायक बन गए और अपने सियासी रसूख की वजह से जेल जाने से बच गए, लेकिन 2012 में जैसे ही यूपी में सपा की सरकार आई तो उदयभान करवरिया पर शिकंजा कसना चालू हुआ। आखिरकार उदयभान ने अपने भाइयों के साथ आत्म समर्पण कर दिया तो साल 2015 में इन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई। तब से 8 साल 3 महीने और 22 दिन ये सभी प्रयागराज की नैनी सेंट्रल जेल में बंद थे और अब जेल में अपने अच्छे आचरण के संबंध में जिला प्रशासन की ओर से भेजी गई संस्तुति पर शासन की ओर से राज्यपाल ने रिहाई का आदेश जारी किया।

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