रोहित शर्मा ने तोड़ी चुप्पी, कहा – अभी संन्यास नहीं, पूरे दमखम से करेंगे वापसी

डिजिटल डेस्क : रोहित शर्मा ने तोड़ी चुप्पी, कहा – अभी संन्यास नहीं, पूरे दमखम से करेंगे वापसी। भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सिडनी में पांच मैचों की टेस्ट सीरीज के आखिरी मुकाबले के दूसरे दिन शनिवार को रोहित शर्मा ने बड़ा खुलासा किया।

रोहित शर्मा ने कहा कि – ‘मैं अभी कोई संन्यास नहीं लेने वाला। यह कोई संन्यास नहीं है और जल्द से जल्द पूरे दम के साथ वापसी करेंगे। मैं  सिर्फ इस टेस्ट में नहीं खेल रहा और खराब फार्म के चलते खुद को ब्रेक दे रहा हूं’।

रोहित बोले – 2 बच्चों का बाप हूं, पता है कि कब क्या करना है

सिडनी टेस्ट के दूसरे दिन लंच के समय एक टीवी चैनल से बातचीत करते हुए रोहित शर्मा ने खुलकर अपने बारे में बातें कीं। रोहित शर्मा ने कहा कि , ‘…मैं खुद सिडनी टेस्ट से बाहर बैठा हूं. अभी बल्ला नहीं चल रहा है। मैंने चयनकर्ताओं और कोच को बताया कि मेरे बल्ले से रन नहीं निकल रहे हैं, इसलिए मैंने हटने का फैसला किया।

…मैं 2 बच्चों का बाप हूं, समझदार हूं, परिपक्व हूं, पता है कब क्या करना है। टीम के आउट ऑफ फॉर्म बल्लेबाजों को इतना महत्वपूर्ण मैच खेलने का मौका नहीं मिलना चाहिए, इसलिए मैंने बाहर बैठने का फैसला किया है।’

रोहित ने खुलकर कहा – सिडनी टेस्ट जीतना जरूरी है, इसलिए खुद को टीम से रखा बाहर

सिडनी टेस्ट के दूसरे दिन शनिवार को दूसरे दिन लंच ब्रेक के दौरान ऑफिशियल ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत में रोहित शर्मा ने तमाम अटकलबाजियों पर विराम लगा दिया और खुलकर अपनी बातें साझा कीं।

रोहित शर्मा ने कहा कि – ‘…मैं जब भी कप्तानी करता हूं, पांच महीने के बाद क्या होने वाला है…छह महीने के बाद क्या होने वाला है, मुझे उसमें विश्वास नहीं है। इस चीज पर ध्यान देने की जरूरत है कि अभी क्या चाहिए टीम को। हमारा पूरा ध्यान इन पांच मैच पर था। हमें बॉर्डर गावस्कर ट्रॉफी रिटेन करनी थी। तो यह फैसला जो लेना था, वह टीम को सामने रखकर लेना था।

…मेरे लिए बहुत मुश्किल था। मैं यहां इतनी दूर से बाहर बैठने थोड़ी आया हूं, बेंच पर बैठने थोड़ी आया हूं। मेरे को मैच खेलना है और अपनी टीम को जिताना है। पहली बार 2007 में जब मैं ड्रेसिंग रूम में आया था, तब से लेकर अब तक यही मानसिकता रही है। कभी कभी आपको समझना पड़ेगा कि टीम की जरूरत क्या है।

…टीम को अगर आप आगे नहीं रखते तो कोई फायदा नहीं है। आप अपने लिए खेलोगे, अपने लिए रन बनाओगे और जाकर ड्रेसिंग रूम में बैठ जाओगे तो उससे क्या होने वाला है। अगर आप टीम के बारे में नहीं सोचते तो ऐसे खिलाड़ी या ऐसे कप्तान हमें नहीं चाहिए। सिर्फ टीम पर ध्यान होना चाहिए।

हम टीम क्यों बोलते हैं इसे…क्योंकि इसमें 11 लोग खेल रहे हैं, कोई अकेला थोड़ी खेल रहा है। जो टीम के लिए जरूरी है, वो करने की कोशिश करो। …निजी हित से ज्यादा जरूरी टीम का ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पांचवां टेस्ट जीतना जरूरी  है। मेरे दिमाग में चल रहा था कि मेरी बैटिंग फॉर्म अच्छी नहीं चल रही है। आप आउट ऑफ फॉर्म खिलाड़ियों को ज्यादा मौके नहीं दे सकते।

…इसलिए मेरी यह समझ थी कि मैं ये बात कोच और चयनकर्ताओं को बताऊं कि ये चीजें मेरे मन में चल रही हैं। उन्होंने मेरे फैसले की सराहना की और कहा कि आप इतने समय से खेल रहे हो और आपको पता है कि आप क्या कर रहे हो और क्या नहीं कर रहे हो। मेरे लिए यह फैसला लेना मुश्किल था, लेकिन अगर सबकुछ सामने रखा जाए तो यह फैसला जरूरी था।

ज्यादा आगे की सोचूंगा नहीं, लेकिन इस समय पर टीम को क्या चाहिए था, बस यही सोच रहा था। इसके अलावा कुछ नहीं सोचा। …यह फैसला मैंने सिडनी आकर लिया।

मेलबर्न टेस्ट खत्म होने के बाद हमारे पास दो दिन का समय था और उसमें भी एक दिन नए साल का था। नए साल पर मुझे चयनकर्ता और कोच से ये बात नहीं करनी थी। ये बात मेरे दिमाग में चल रही थी कि मैं कोशिश कर रहा हूं, लेकिन हो नहीं रहा है। तो यह मुझे समझना होगा कि मुझसे नहीं हो रहा है और मेरे लिए किनारे हटना जरूरी था’। 

अपने संन्यास को लेकर लगे अटकलों पर रोहित शर्मा ने क्या कुछ कहा, पढ़िए प्रमुख अंश…

सिडनी टेस्ट के दूसरे दिन लंच ब्रेक के दौरान ऑफिशियल ब्रॉडकास्टर स्टार स्पोर्ट्स से बातचीत के दौरान रोहित शर्मा ने उन सभी रिपोर्ट्स का खंडन किया, जिसमें कहा जा रहा था कि रोहित टेस्ट से संन्यास लेने जा रहे हैं।

रोहित शर्मा बोले – ‘…ये जो फैसला है, वह संन्यास का नहीं है और न ही मैं पीछे हटने वाला हूं इस प्रारूप से। सिडनी टेस्ट से मैं बाहर हुआ हूं क्योंकि बल्ला नहीं चल रहा है। कोई गारंटी नहीं है कि पांच महीने के बाद बल्ला नहीं चलेगा…कोई गारंटी नहीं है कि दो महीने के बाद बल्ला नहीं चलेगा। क्रिकेट में हम सबने देखा है कि हर सेकंड, हर क्षण जिंदगी बदलती है।

…मुझे अपने आप पर विश्वास है कि चीजें बदलेंगी। हालांकि, मुझे इस क्षण में क्या जरूरी है, उस पर भी ध्यान देना था। कोई क्या बोल रहा (संन्यास कि रिपोर्ट्स) उससे हमारी जिंदगी नहीं बदलती है। ये लोग फैसला नहीं ले सकते कि हम कब संन्यास लें, हम कब नहीं खेलें, हमें कब बाहर बैठना है या हम कब कप्तानी करें’।

Saffrn

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