महाकुंभ में नागा साधु बनने में 104 अभ्यर्थी हुए फेल, 3500 से ज्यादा हुए पास

डिजिटल डेस्क : महाकुंभ में नागा साधु बनने में 104 अभ्यर्थी हुए फेल, 3500 से ज्यादा हुए पास। महाकुंभ 2025 में मकर संक्रांति के स्नान के बाद बड़ी संख्या में आवेदकों ने मेला क्षेत्र में पधारे 13 अखाड़ों में नागा साधु एवं पदाधिकारी बनने के लिए आवेदन किया था। इनका कई चरणों के सत्यापन एवं जांच के बाद परिणाम घोषित कर दिया गया है। इसमें अलग-अलग कारणों से कुल 104 अभ्यर्थियों को अयोग्य यानी फेल घोषित कर दिया गया है जबकि कड़ी प्रतियोगिता में करीब 3500 अभ्यर्थी सफल घोषित हुए हैं।

पास हुए अभ्यर्थियों को वसंत पंचमी पर मिलेगी दीक्षा

महाकुंभ में मकर संक्रांति के बाद से अभी तक 13 अखाड़ों से 30 महामंडलेश्‍वर और 35 सौ से ज्‍यादा नागा संन्‍यासी बनाए जा चुके हैं। वसंत पंचमी को तीसरे अमृत स्‍नान तक महामंडलेश्‍वर पद के लिए पट्टाभिषेक और नागा संन्‍यासियों को दीक्षा दी जाएगी। अखाड़ों की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इस प्रक्रिया में जो पहले से संन्‍यासी होता है उसे महामंडलेश्‍वर की पदवी दी जाती है। वहीं, विरक्‍त जीवन का संकल्‍प लेने वालों को नागा संन्‍यासी बनाया जाता है। 

फेल हुए अभ्यर्थियों की छवि धर्म और परंपरा के विपरीत मिली…

इसी क्रम में खास बात यह है कि इन अभ्यर्थियों की कई स्तर पर जांच-परख कराई गई और उसके बाद परिणाम घोषित किए गए हैं। बताया जाता है कि अखाड़ों में पद और संन्‍यास देने से पहले संबंधित व्‍यक्ति और संत के आवेदन पर तीन स्‍तरीय जांच होती है। महामंडलेश्वर और नागा साधु पदों के लिए अखाड़ों में आवेदन लिया जाता है। संत और व्‍यक्ति अपना जन्‍मस्‍थान, संगे संबंधियों का ब्‍योरा, शैक्षिक योग्‍यता, कोई मुकदमा है या नहीं और प्रॉपर्टी की जानकारी देते हैं। अखाड़े के जिलेदारों के माध्‍यम से उनकी जांच कराई जाती है। जिलेदार अपनी रिपोर्ट अखाड़े के पंच परमेश्‍वर को देते हैं। पंच रिपोर्ट को देखकर अपने हिसाब से जांच करते हैं। इसके बाद अखाड़े के सभापति को फाइनल रिपोर्ट दी जाती है। इस बार कुंभ में कसौटी पर खरा नहीं उतरने वाले महामंडलेश्‍वर पद के आवेदकों में 12 और नागा संन्‍यासी के लिए 92 अभ्‍यर्थी फेल हो गए हैं। जांच में इनकी छवि धर्म और परंपरा के विपरीत मिली है। कुछ लोगों की शैक्षिक योग्‍यता गलत पाई गई है।

फेल हुए अभ्यर्थियों को पदवी देने से अखाड़ों ने किया साफ मना…

मिली जानकारी के मुताबिक, फेल हुए अभ्यर्थियों को जूना, आवाहन, निरंजनी और बड़ा उदासीन अखाड़ा ने किसी भी तरह की पदवी देने से मना कर दिया है। फाइनल रिपोर्ट मिलने के बाद सभापति कुछ महात्‍तमाओं के जरिये सभी तथ्‍यों का वेरीफिकेशन कराते हैं। तब जाकर नागा संन्‍यासी और महामंडलेश्‍वर की पदवी प्रदान की जाती है। जानकारी के मुताबिक, इस बार कुंभ मेले में महामंडलेश्‍वर पद के लिए निरंजनी अखाड़े में छह, जूना अखाड़े में चार और आवाहन अखाड़े को दो संतों के बारे में दिए गए तथ्‍य गलत मिले। इसकी वजह से इन सबको महामंडलेश्‍वर की उपाधि नहीं दी गई।

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