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पान तांती समाज में फिर जगी न्याय की आस, राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में दायर किया पेटीशन

पटना: बिहार में विधानसभा चुनाव है और ऐसे में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार समेत एनडीए सभी जातियों को साधने में जुटे हुए हैं। नीतीश कुमार की सरकार लंबे समय से आन्दोलनरत पान तांती समाज के लोगों को एक बार फिर अनुसूचित जाति (SC) में शामिल करने की कवायद में जुट गई है। शुक्रवार को बिहार सरकार के सामान्य प्रशासन विभाग की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार नीतीश कुमार की सरकार सुप्रीम कोर्ट के द्वारा जुलाई 2024 में दिए गए फैसले के विरुद्ध रिव्यू पेटीशन दाखिल की है।

जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए बिहार सरकार के संकल्प को रद्द करते हुए पान तांती समाज को अनुसूचित जाति की श्रेणी से हटा कर पिछड़े वर्ग की श्रेणी में शामिल करने का आदेश दिया था। अब नीतीश सरकार एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का रिव्यू करने का अनुरोध की है। बता दें कि राज्य सरकार के 01 जुलाई 2015 के संकल्प के अनुसार पान तांती समाज को अनुसूचित जाति की श्रेणी में शामिल किया गया था।

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राज्य सरकार के संकल्प के विरुद्ध डॉ भीमराव अंबेडकर विचार मंच एवं आशीष रजक ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। हाई कोर्ट ने जब इस मामले में सुनवाई से इंकार कर दिया तब याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया। याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस विक्रम नाथ और प्रशांत कुमार मिश्रा की बेंच ने कहा था कि आर्टिकल 341 के तहत एससी श्रेणी में किसी भी जाति को शामिल करने का अधिकार राज्यों के पास नहीं है।

यह काम केवल संसद कर सकती है। सुप्रीम कोर्ट ने 9 वर्ष पुराना संकल्प को रद्द करते हुए एससी कोटे से सरकारी लाभ लेने वाले लोगों को ईबीसी कोटे में समायोजित करने का निर्देश देते हुए कहा था कि रिक्त हुए पदों पर एससी जाति के लोगों को भरा जाये।

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