JSSC-CGL पेपर लीक केस: FSL रिपोर्ट से खुलासा, CID ने बदला रुख

रांची: JSSC-CGL पेपर लीक मामले में नया मोड़ आ गया है। फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (FSL) की रिपोर्ट ने इस पूरे प्रकरण को और गंभीर बना दिया है। इस रिपोर्ट के सामने आने के बाद CID को भी अपना पुराना हलफनामा वापस लेना पड़ा है।

पूर्व महाधिवक्ता और याचिकाकर्ता पक्ष के वकील अजीत कुमार ने 22 Scope से खास बातचीत में बताया कि FSL रिपोर्ट में ऐसे सबूत मिले हैं जो इस बार पेपर लीक को पहले से भी ज्यादा स्पष्ट साबित करते हैं। फरवरी 2024 में जब JSSC ने लीक की आशंका मानते हुए परीक्षा रद्द की थी, तब से कहीं अधिक ठोस साक्ष्य अब सामने आए हैं।

नौ मोबाइलों से मिले पुख्ता सबूत

अजीत कुमार ने कहा कि कुल नौ मोबाइल डिवाइस की जांच FSL ने की। इनमें से कई में 22 सितंबर 2024 की परीक्षा से कई घंटे पहले ही प्रश्नों के उत्तर भेजे गए पाए गए।
उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा—

  • यदि किसी प्रश्न का सही उत्तर “√3” था, तो वही विकल्प मोबाइल मैसेज में लिखा मिला।

  • यदि किसी प्रश्न का उत्तर “सोराय पेंटिंग” था, तो यह भी पहले से मैसेज में मौजूद था।

रिपोर्ट के अनुसार, सभी डिवाइस नॉन-टैंपर्ड पाए गए, यानी इनमें किसी तरह की छेड़छाड़ नहीं की गई। इसका मतलब यह हुआ कि जो संदेश मिले, वे सही समय और वास्तविक रूप से भेजे गए थे।

JSSC-CGL पेपर लीक केस: FSL रिपोर्ट से खुलासा, CID ने बदला रुख
JSSC-CGL पेपर लीक केस: FSL रिपोर्ट से खुलासा, CID ने बदला रुख

CID का पलटा हलफनामा

शुरुआत में CID ने अदालत में हलफनामा देकर कहा था कि “पेपर लीक का कोई सबूत नहीं मिला”। लेकिन अदालत ने इस पर नाराजगी जताई और सवाल उठाए। इसके बाद CID को अपना हलफनामा वापस लेना पड़ा। अजीत कुमार का कहना है कि यह अपने आप में बड़ा संकेत है कि जांच एजेंसी शुरू से मामले को दबाने की कोशिश कर रही थी।

सरकार और JSSC पर उठे सवाल

अजीत कुमार ने आरोप लगाया कि सरकार और आयोग दोनों ने इस मामले को शुरू से हल्के में लिया। FIR दर्ज करने में दो महीने की देरी हुई और शुरू से ही परीक्षा को बचाने की कोशिश होती रही।
उन्होंने कहा कि अदालत ने भी साफ कहा है कि जांच अधिकारी (IO) का काम सिर्फ तथ्यों को रखना है, न कि किसी खास दिशा में मंतव्य देना।

छात्रों का भविष्य अधर में

अब दो वर्ग के छात्र प्रभावित हो रहे हैं—

  1. वे जिनकी डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन पूरी हो चुकी है और नियुक्ति का इंतजार है।

  2. वे जो मांग कर रहे हैं कि परीक्षा रद्द की जाए और दोबारा आयोजित हो।

अजीत कुमार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले भी यही कहते हैं कि यदि प्रतियोगी परीक्षा की पारदर्शिता संदिग्ध हो, तो उसे रद्द कर देना ही न्यायसंगत है।

आगे क्या?

मामला अब पूरी तरह अदालत के फैसले पर निर्भर है। CID की जांच अभी जारी है और इसमें समय लग सकता है। अदालत यह तय करेगी कि परीक्षा रद्द होगी या चयन प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

अजीत कुमार ने कहा कि JSSC जैसी संस्था की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल उठना गंभीर चिंता का विषय है। यदि सरकार और आयोग पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं करते, तो छात्रों का भरोसा पूरी तरह टूट सकता है।

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