अब आदिवासी महिलाएं करेंगी टूरिस्ट गाइड का काम, आजीविका और सशक्तिकरण की नई राह

Ranchi: पलामू टाइगर रिजर्व (Palamu Tiger Reserve) में सामुदायिक संरक्षण और आजीविका सृजन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए चार आदिवासी महिलाओं को पहली बार टूरिस्ट गाइड के रूप में नियुक्त किया गया है। बेतला राष्ट्रीय उद्यान में इस साल अक्टूबर से शुरू हुई नई जंगल सफारी में इन महिलाओं को शामिल किया गया है, इस पहल के साथ ही  इस क्षेत्र में महिलाओं की नई भागीदारी की शुरुआत है।

केचकी गांव की निवासी सोनम कुमारी, परिणीता कुमारी, रानी कुमारी और रेखा कुमारी अब औपचारिक रूप से गाइड के रूप में कार्यरत हैं। इन नियुक्तियों से न केवल स्थानीय महिलाओं को रोजगार के नए अवसर मिले हैं, बल्कि उनका आत्मविश्वास भी बढ़ा है।

नए कौशल, नई भाषा और नई पहचानः

सोनम कुमारी, जो पलामू के जनता शिवरात्रि कॉलेज में स्नातक की छात्रा हैं, बताती हैं कि गाइड के रूप में काम करने से उन्हें पीटीआर को और गहराई से समझने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि वे बंगाली और थोड़ा-बहुत अंग्रेज़ी भी सीख चुकी हैं, क्योंकि यहां अधिकतर पर्यटक पश्चिम बंगाल से आते हैं। वह कॉलेज जाने से पहले रोज़ाना दो से तीन सफारी टूर कराती हैं, जिससे उनकी पढ़ाई के साथ-साथ कौशल विकास भी हो रहा है।

एक अन्य गाइड रानी का कहना है कि वन अधिकारियों ने उन्हें पीटीआर में पाई जाने वाली वनस्पतियों, जीवों और उनके वितरण की पहचान का विशेष प्रशिक्षण दिया। वह बताती हैं कि गाइड के रूप में काम करने से वह पहली बार परिवार की आर्थिक सहयोगी बन पाई हैं।

‘हुनर से रोजगार’ कार्यक्रम से मिली नई दिशाः

Palamu Tiger Reserve (पीटीआर, उत्तर) के उप निदेशक पीके जेना ने बताया कि इन महिलाओं को “हुनर से रोज़गार” कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण दिया गया है। यह पहल पिछले वर्ष नवंबर में शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य स्थानीय युवाओं के कौशल को विकसित कर रोजगार के अवसर बढ़ाना है। अब तक 8 बैचों में लगभग 250 युवाओं को इलेक्ट्रीशियन, कंप्यूटर ऑपरेटर, हल्के वाहन चालक और अन्य ट्रेडों में प्रशिक्षित किया जा चुका है। इनमें से कई अब स्थानीय संगठनों और अन्य जिलों में कुशल पेशेवरों के रूप में काम कर रहे हैं।

भविष्य की बड़ी योजनाः

जेना ने बताया कि आने वाले तीन वर्षों में लगभग 2,500 ग्रामीण युवाओं को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है। इसके लिए बाघ अभयारण्य के आसपास दो आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र भी बनाए जा रहे हैं, ताकि स्थानीय समुदाय को ही श्रेष्ठ मौके उपलब्ध कराए जा सकें। आदिवासी महिलाओं की यह नई पहल पलामू के ग्रामीण समाज में सशक्तिकरण, समान अवसर और समुदाय-आधारित संरक्षण का नया अध्याय साबित हो रही है।

 

 

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