आरा : ‘विकसित भारत जी राम जी योजना’ जनजागरण अभियान के तहत कृषि मंत्री रामकृपाल यादव ने आरा परिसदन में प्रेस कान्फ्रेंस करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 2047 तक विकसित भारत बनाना चाहते हैं। विकसित भारत के लिए विकसित गांव बनाना जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए मोदी सरकार ने मनरेगा के स्थान पर विकसित भारत गारंटी और रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण) यानि विकसित भारत जी राम जी विधेयक 2025 को संसद से पास करवाया है। राष्ट्रपति के अनुमोदन के बाद यह कानून का रूप ले चुका है। यह कानून विकसित ग्राम और स्वावलंबी भारत की आधारशिला है।
मनरेगा में 100 दिन की रोजगार की गारंटी थी जिसे नए कानून में बढॉाकर 125 दिन कर दिया गया है – मंत्री रामकृपाल यादव
मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि मनरेगा में 100 दिन की रोजगार की गारंटी थी जिसे नए कानून में बढॉाकर 125 दिन कर दिया गया है। नई योजना भ्रष्टाचार मुक्त, टेक्नोलॉजी आधारित और मजदूर केंद्रित सुधार है। काम न मिलने पर बेरोजगारी भत्ता और भुगतान में देरी पर दंड का प्रावधान है। ग्राम पंचायतों को पूरा अधिकार है कि वे तय करें कौन सा काम गांव में हो। अब दिल्ली और पटना नहीं तय करेंगें कि किस गांव में कौन सा काम होगा। अब गांव अपने परिस्थितियों के हिसाब से खुद अपने विकास का प्लान बनाएंगे।

कृषि मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम वास्तव में भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम है
कृषि मंत्री ने कहा कि कांग्रेस का मनरेगा बचाओ संग्राम वास्तव में भ्रष्टाचार बचाओ संग्राम है। अब जेसीबी से तालाब खोदना और फिर उसे भर कर 80 साल का फर्जी मजदूर की फर्जी उपस्थिति दिखा कर पैसा निकालने के धंधे पर मोदी सरकार ने पूर्ण विराम लगा दिया है। इसी का दर्द क्रांगेस और इंडी गठबंधन को हो रहा है। अब केवल मिट्टी नहीं खोदेंगे, विकास की नींव रखेंगे। इंडी गठबंधन वालों को भगवान राम से भी परेशानी है और विकसित भारत से भी। यह देश ही राम का है। यहां तो हर कंकड़ शंकर है। हर कण में राम बसे हैं। नए अधिनियम का मुख्य उददेश्य जल सुरक्षा एवं जल संबंधी कार्य, मुख्य ग्रामीण बुनियादी ढांचा, आजीविका संबंधी बुनियादी ढांचा एवं खराब मौसम के कारण काम में कमी को कम करना है।
‘जब मनरेगा शुरू हुई, तब ग्रामीण बेरोजगारी बड़ी चुनौती थी’
उन्होंने कहा कि जब मनरेगा शुरू हुई, तब ग्रामीण बेरोजगारी बड़ी चुनौती थी। आज देश के सड़क इन्फ्रास्ट्रक्चर, रेल एवं हवाई इन्फ्रास्ट्रक्चर, डिजीटल इन्फ्रास्ट्रक्चर, कृषि इन्फ्रास्ट्रक्चर, शहरी और ग्रामीण इन्फ्रास्ट्रक्चर में काफी परिवर्तन आया है। आजीविका में विविधता आई है। ग्रामीण भारत तेजी से बदल रहा है। 2011-12 में ग्रामीण गरीबी 25.7 फीसदी थी जो 2023-24 में घटकर 4.86 फीसदी रह गई। पुराना मॉडल अब आज की ग्रामीण अर्थव्यवस्था से मेल नहीं खाता है। 2005 की जरूरतें अलग थीं, 2025 की जरूरतें अलग हैं, इसलिए योजना को पुनः व्यवस्थित करना आवश्यक था।
अबतक मनरेगा पर 11.74 लाख करोड़ खर्च हो चुके हैं – कृषि मंत्री
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अबतक मनरेगा पर 11.74 लाख करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं। युपीए सरकार ने दो लाख करोड़ तो मोदी सरकार ने चार गुना से अधिक आठ लाख 53 हजार करोड़ रुपए खर्च किए हैं। इस वर्ष एक लाख 51 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है। इसमें से 95,600 करोड़ रुपए केंद्र सरकार देगी। प्रशासनिक व्यय को छह फीसदी से बढ़ाकर नौ फीसदी किया गया है ताकि रोजगार सहायकों, तकनीकी स्टाफ और मेट्स को समय पर मानदेय मिले।

रामकृपाल यादव ने कहा- यह योजना गांव को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने का ब्लूप्रिंट है
रामकृपाल यादव ने बताया कि अब जल संरक्षण, सड़क, स्कूल, आंगनबाड़ी भवन, अस्पताल, खेत-तालाब, चेक डैम, एफपीओ संरचना, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन जैसे ठोस कार्य होंगे। यह योजना गांव को आत्मनिर्भर और स्वावलंबी बनाने का ब्लूप्रिंट है। 1980 में इंदिरा गांधी ने सभी पुरानी रोजगार योजनाओं को मिलाकर राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार कार्यक्रम शुरू किया। जिसे राजीव गांधी सरकार ने जवाहर रोजगार योजना नाम दिया।
‘सोनिया-मनमोहन सरकार ने 26 साल बाद 2006 में इसे नरेगा किया’
सोनिया-मनमोहन सरकार ने 26 साल बाद 2006 में इसे नरेगा किया, जिसे 2009 में मनरेगा कर दिया गया। यानि रोजगार योजना का नाम पहले से महात्मा गांधी जी के नाम पर नहीं था। जब कांग्रेस सरकार ने जवाहर रोजगार योजना का नाम बदला था तो क्या यह पंडित जवाहरलाल नेहरू का अपमान था? उसी तरह इंदिरा गांधी ने आवास योजना शुरू किया, बाद में राजीव गांधी ने उसको इंदिरा आवास कर दिया अब ये प्रधानमंत्री आवास योजना है। इसका मतलब है कि कोई योजना अगर लंबे समय से चल रही है तो देश की आर्थिक, सामाजिक एवं अन्य परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए समय की मांग के हिसाब से उसमें परिवर्तन करना जरूरी हो जाता है।
देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं और पुरस्कारों के नाम गांधी परिवार पर रखे गए – रामकृपाल यादव
देश के लगभग 600 संस्थानों, योजनाओं और पुरस्कारों के नाम गांधी परिवार पर रखे गए। खेल रत्न पुरस्कार भी राजीव गांधी के नाम किया गया जबकि खेल में उनका कोई योगदान नहीं था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने अपने या किसी के नाम पर योजना का नामकरण नहीं किया, बल्कि उसे सेवा से जोड़ा। उन्होने प्रेस द्वारा पूछे गए एक सवाल पर कहा कि बिहार प्रतिपक्ष का नेता चुनाव में थकने के बाद विदेश भ्रमण करने गए। आज लालू जी का पार्टी समाजवाद की नीति पर नही परिवारवाद पर चल रही है।
मंत्री के साथ कई स्थानीय नेता रहे मौजूद
इस अवसर पर भाजपा जिलाध्यक्ष दुर्गा राज, जदयू जिला अध्यक्ष भीम पटेल, आरएलएम के जिला रोहित कुशवाहा, हम पार्टी के जिला अध्यक्ष मुन्ना पांडे, लोजपा जिलाध्यक्ष राजेश्वर पासवान, मीडिया प्रमुख संजय कुमार सिंह, जिला प्रवक्ता धर्मेंद्र सिंह, सीडी शर्मा, हरेंद्र पांडेय, मिथलेश कुशवाहा, धीरेंद्र सिंह, प्रहलाद राय, नरेंद्र तिवारी, सूर्यकांत पांडेय, राजकुमार कुशवाहा, विभु जैन और विद्यासागर पांडेय सहित एनडीए कार्यकर्ता शामिल थे।
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नेहा गुप्ता की रिपोर्ट
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