झारखंड में बालू घाटों की लीज और पर्यावरण स्वीकृति में देरी से बालू संकट गहरा गया है। चोरी का बालू तीन गुना कीमत पर बिक रहा है।
Jharkhand Sand Crisis रांची: झारखंड में बालू व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गयी है। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की रोक लागू होने में अब सिर्फ 18 दिन बचे हैं, लेकिन राज्य के अधिकांश बालू घाट अब तक कागजी प्रक्रिया में ही फंसे हैं। कैटेगरी-2 के 444 बालू घाटों में से 145 घाटों का अब तक टेंडर ही नहीं हुआ है। वहीं जिन 299 घाटों की नीलामी हुई, उनमें से केवल 35 घाटों को पर्यावरण स्वीकृति मिली है और सिर्फ 13 घाटों की लीज फाइनल हो सकी है।
स्थिति यह है कि वैध खनन लगभग ठप है और इसका सीधा फायदा बालू माफिया उठा रहे हैं। लोग मजबूरी में तीन गुना अधिक कीमत पर चोरी का बालू खरीद रहे हैं। रांची में 100 सीएफटी चोरी का बालू 4800 से 5500 रुपए तक बिक रहा है, जबकि पश्चिमी सिंहभूम में इसकी कीमत 7000 रुपए तक पहुंच गयी है।
Jharkhand Sand Crisis: बालू माफिया सक्रिय, नदी से खुलेआम हो रहा अवैध खनन
टेंडर और लीज प्रक्रिया में देरी के कारण राज्य में वैध तरीके से बालू खनन नहीं हो पा रहा है। इसका फायदा उठाकर बालू माफिया दिन-रात नदियों से अवैध खनन कर रहे हैं। अवैध रूप से बालू का स्टॉक किया जा रहा है, ताकि एनजीटी की रोक लागू होने के बाद कृत्रिम संकट पैदा कर ऊंची कीमत वसूली जा सके।
सूत्रों के अनुसार कई जिलों में प्रशासनिक निगरानी कमजोर होने के कारण अवैध परिवहन और भंडारण तेजी से बढ़ा है। कई स्थानों पर ट्रैक्टरों और हाइवा के जरिए खुलेआम बालू ढोया जा रहा है।
Jharkhand Sand Crisis: 95 प्रतिशत घाटों से खनन शुरू नहीं
444 घाटों में से 299 की नीलामी होने के बावजूद केवल 13 घाटों से ही बालू उठाव शुरू हो पाया है। यानी 95 प्रतिशत से अधिक घाट अब भी प्रक्रिया में फंसे हुए हैं। जानकारी के अनुसार 22 बालू घाटों की एग्रीमेंट फाइलें अलग-अलग जिलों के डीसी कार्यालयों में लंबित हैं।
इनमें दुमका में पांच, खूंटी में तीन, रामगढ़ में तीन, रांची में तीन, हजारीबाग में दो, गोड्डा में दो, लातेहार में दो, जामताड़ा में एक और पूर्वी सिंहभूम में एक घाट की फाइल अटकी हुई है।
गिरिडीह, कोडरमा और जामताड़ा जैसे जिलों में अब तक एक भी घाट का टेंडर नहीं हो पाया है। पलामू और गढ़वा में 18 से अधिक घाट होने के बावजूद सिर्फ एक-एक घाट की नीलामी हुई है।
Key Highlights
झारखंड के 444 बालू घाटों में सिर्फ 13 से हो रहा उठाव
145 घाटों का अब तक टेंडर नहीं, 286 घाटों की लीज लंबित
रांची में चोरी का बालू 5500 रुपए तक बिक रहा
बालू संकट से मकान निर्माण लागत 40 प्रतिशत तक बढ़ी
गढ़वा में 150 ट्रैक्टर मालिकों के खिलाफ वारंट जारी
Jharkhand Sand Crisis: मकान निर्माण से लेकर सरकारी योजनाएं प्रभावित
बालू की बढ़ती कीमत का असर आम लोगों पर साफ दिखाई दे रहा है। मकान निर्माण की लागत 30 से 40 प्रतिशत तक बढ़ गयी है। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनने वाले गरीबों के घर भी प्रभावित हो रहे हैं, क्योंकि सरकारी सहायता राशि मौजूदा बाजार दर के सामने कम पड़ रही है।
पुल-पुलिया और सड़क जैसी सरकारी योजनाओं की गति भी धीमी हो गयी है। कई निर्माण एजेंसियों को समय पर बालू नहीं मिल पा रहा है।
Jharkhand Sand Crisis: गढ़वा में 150 ट्रैक्टर मालिकों पर वारंट
Garhwa में प्रशासन ने अवैध बालू परिवहन के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। अनुमंडल पदाधिकारी संजय कुमार ने एनएच-39 स्थित टोल प्लाजा का सीसीटीवी फुटेज खंगालने के बाद करीब 150 ट्रैक्टर मालिकों के खिलाफ वारंट जारी किया है।
फुटेज में 12 घंटे के भीतर लगभग 200 ट्रैक्टर अवैध रूप से बालू ढोते दिखाई दिये। परिवहन विभाग की मदद से ट्रैक्टर मालिकों की पहचान की गयी। इनमें कई ऐसे लोग मिले जो पहले भी अवैध बालू परिवहन में पकड़े जा चुके हैं।
Highlights







