समस्तीपुर: सावन माह की पंचमी को विभूतिपुर के सिंघिया घाट पर नागपंचमी का उत्सव मनाया गया। इस दौरान भगत राम कुमार सिंह ने माता विषहरी का नाम लेते हुए मंदिर के गहवर से पांच दर्जन से अधिक सांप निकाले। वहीं सांप को पकड़कर भगत ने घंटों विषहरी माता का नाम लेते हुए विषधरों के साथ करतब दिखाए। वहीं उसके बाद सैकड़ों की संख्या में हाथ में सांप लिए हुए सभी बूढ़ी गंडक नदी के सिंघिया घाट की ओर चले। जहां नदी में प्रवेश करने के बाद माता का नाम लेते हुए भगत ने दर्जनों सांप निकालें।
इस दौरान नदी के घाट पर मौजूद हज़ारो भक्त नागराज व विषधर माता के नाम का जयकारा लगाते रहे।भगत ने जितनी बार नदी में डुबकी लगाई उतनी बार एक साथ दो-चार सांप हाथों से निकालकर श्रद्धालुओं के हवाले किया।वही सारे सांप लेकर भगत अपने श्रद्धालुओं के साथ मंदिर की ओर वापस लौट गए।सिंघीयघाट पर नाग पंचमी की पूजा व मेला को लेकर घंटो भक्तिमय माहौल बना रहा।बताया जाता है कि सिंघिया घाट के पास बूढ़ी गंडक नदी किनारे वर्षो से सांपो का मेला लगता है।जहा बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटती है।
इस मेले का दूसरे छेत्र के लोग भी इंतज़ार करते रहते है।इस वर्ष भगत ने पूजा के बाद नदी से सांप निकाला तो लोगों ने जयकारा लगाया।कहा जाता है कि इस इलाके के लोग सांप को नही मारते। इतनी संख्या में सांप लेकर चलने के बाद भी आज तक इस मेले में किसी को सांप ने नही डंसा।मेला लगने से एक महीने पहले से ही इसकी तैयारी शुरू हो जाती है।
स्थानीय लोग सांप पकड़कर घरों में रखना शुरू कर देते है और नागपंचमी के दिन वो सांप लेकर झुंड बनाकर दूसरे पहर नदी के घाट पर जाते है।नागपंचमी से एक दिन पहले रात भर जागरण होता है।सभी लोग सांप,नाग लेकर जुटते और रात भर की पूजा अर्चना के बाद लोग जुलूस निकालते हुए नदी जाते,स्नान करके सांप या नाग को दूध लावा खिलाकर सांप को जंगल मे छोर देते है







