बढ़ती ठंड में मछलियों की सेहत को लेकर विभाग से की एडवाइजरी जारी,नहीं बरती सावधानी तो घाटा तय
पटना : बिहार सरकार डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग राज्य में मछली उत्पादन को बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयासरत रही है। इसी कड़ी में विभाग ने इस कड़ाके की ठंड से मछली पालकों के लिए खास एडवाइजरी जारी की है। जिससे मछली पालक विभाग की सलाह का पालन करके न सिर्फ मछलियों की उचित देखभाल कर सकते हैं, बल्कि अपनी आमदनी भी बढ़ा सकते हैं।
यदि मछली पूरक आहार ग्रहण नहीं करती हो क्या करे ?
विभाग ने अधिकारियों ने कहा है कि औसत तापमान 15 डिग्री सेल्सियस से कम होने पर यदि मछली पूरक आहार ग्रहण नहीं करती हो, तो पूरक आहार का प्रयोग बंद कर दें। ठंड के मौसम में प्राकृतिक आहार की उपलब्धता तालाब में बनाए रखने के लिए प्रति एकड़ की दर से प्रत्येक 10 से 15 दिनों के अंतराल पर 15 किलोग्राम चूना, 15 किलोग्राम सिंगल सुपर फॉस्फेट, 5 किलोग्राम मिनरल मिक्सचर व 50 किलोग्राम सरसों या राई की खली (पानी में भिगोकर) घोलकर तालाब में छिड़काव करना अनिवार्य है।
मछलियों की सेहत के लिए करें बुटॉक्स, क्लिनर या टिनिक्स का छिड़काव
विभाग के अधिकारियों ने मछली पालन को सलाह के तौर पर यह भी बताया कि मत्स्य बीज उत्पादकों को कॉमन कार्प का ब्रीडिंग जनवरी के अंतिम सप्ताह या फरवरी माह से प्रारंभ कराने के लिए 15-20 दिन पूर्व नर व मादा कॉमन कार्प के प्रजनक मछली (ब्रूड) को दो अलग-अलग तालाबों में संचय कर लेना चाहिए। प्रजनक मछली (ब्रूड) को आरगुलस के संक्रमण से बचाने के लिए आवश्यकतानुसार 80-100 मिलीलीटर प्रति एकड़ की दर से बुटॉक्स, क्लिनर या टिनिक्स का छिड़काव दिन में 10 बजे पूर्वाह्न से 2 बजे अपराह्न के बीच करें।
ठंड में परजीवी संक्रमण व फफूंद से मछलियों को बचाव
सलाह में यह भी बताया कि ठंड के मौसम में मछलियों को परजीवी संक्रमण व फफूंद जनित संक्रमण से बचाव के लिए 40-50 किलोग्राम प्रति एकड़ की दर से नमक का घोल बनाकर छिड़काव करें। इसके अलावा वीकेसी (80 प्रतिशत)1 लीटर प्रति एकड़ की दर से घोलकर छिड़काव करें। ठंड के मौसम में कार्प मछली वाले तालाब में न्यूनतम पानी का स्तर 5-6 फीट व पंगेसियस मछली वाले तालाब में न्यूनतम पानी का स्तर 8-10 फीट बनायें रखें। पंगेसियस मछली के तालाबों में प्रतिदिन 10 से 20 प्रतिशत तक पानी का बदलाव ट्यूबवेल के पानी से करें। तापमान अधिक गिरने व कोहरा छाने की स्थिति में तालाब में किसी तरह का क्रियाकलाप जैसे- पूरक आहार, चूना, खाद, गोबर, दवा इत्यादि का छिड़काव बंद कर दें। तालाब का पानी अत्यधिक हरा होने पर चूना व रासायनिक खाद का प्रयोग बंद कर दें। साथ ही तालाब में 800 ग्राम प्रति एकड़ की दर से कॉपर सल्फेट का प्रयोग पानी में घोलकर करें।
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