30 साल बाद सहरसा को मिलेगा ओवर ब्रिज, विरोध के बीच जनता में उत्साह

सहरसा : सहरसा शहर की सबसे बड़ी समस्या में से एक बंगाली बाजार आरओबी (रेलवे ओवर ब्रिज) निर्माण का काम आखिरकार शुरू हो चुका है। वर्षों से लंबित इस मांग को लेकर अब जनता में उत्साह है, लेकिन कुछ व्यापारियों द्वारा इसका विरोध भी सामने आ रहा है। सहरसा की आबादी 25 लाख से अधिक है और यहां जाम की समस्या लंबे समय से लोगों के लिए सिरदर्द बनी हुई थी। बंगाली बाजार में प्रस्तावित ओवर ब्रिज को लेकर अब निर्माण की राह साफ हो गई है।

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सहरसा की आबादी 25 लाख से अधिक है, यहां की जनता एक ओवर ब्रिज के कारण कितना समस्या झेल रही है

आपको बता दें कि सहरसा की आबादी 25 लाख से अधिक है और यहां की जनता एक ओवर ब्रिज के कारण कितना समस्या झेल रही है यह किसी से छुपी नही है। लंबे समय के बाद जब इसकी स्वीकृति मिली है तो कुछ पूंजीपति लोग इसका विरोध कर रहे हैं लेकिन लोग मानने के लिए तैयार नही है। ओवर ब्रिज निर्माण को लेकर अब समान जुटना शुरू हो गया है। सहरसा की जनता का कहना है कि शहर की यातायात समस्या को दूर करने के लिए यह कदम ऐतिहासिक साबित होगा।

’30 वर्षों से उलझी ओवर ब्रिज की समस्या अब समाप्त होने राह पर है’

वहीं सहरसा में 30 वर्षों से उलझी ओवर ब्रिज की समस्या अब समाप्त होने राह पर है। ओवर ब्रिज निर्माण को लेकर समान जमा होना शुरू हो गया है। चंद व्यापारी इसका वेवजह विरोध कर रहे हैं लेकिन वह इस विरोध में असफल साबित हो रहे हैं। सहरसा की आबादी लोकसभा क्षेत्र के मानक अनुरूप है लेकिन इस सबों को यह जानकारी नही है। 98 प्रतिशत बाजार खुला है। दो प्रतिशत दुकानें बंद की गईं, लेकिन वह भी ओवर ब्रिज निर्माण के समर्थन में हैं। इस बीच कुछ व्यापारी इसे जातीय रंग देने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि यह शहर की सुविधा और विकास से जुड़ा मामला है।

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सहरसा के चंद व्यापारी बंगाली बाजार में बनने वाले ओवर ब्रिज को जाति आधारित ओवर ब्रिज का नाम दे रहे हैं

दरअसल, सहरसा के चंद व्यापारी बंगाली बाजार में बनने वाले ओवर ब्रिज को जाति आधारित ओवर ब्रिज का नाम दे रहे हैं। क्या ओवर ब्रिज पर सिर्फ जाति के लोग चढ़ेंगे? ओवर ब्रिज वर्षों की तपस्या और सहरसा डीएम के अथक प्रयास से बनेगा और इस पर सभी वर्ग के लोग चढ़ेंगे। ओवर ब्रिज निर्माण में बाधक बनने के लिए कुछ ने विरोध किया लेकिन सभी ओवर ब्रिज निर्माण के समर्थन में हैं। सहरसा के लोगों को उम्मीद है कि बंगाली बाजार आरओबी बनने के बाद शहर की जाम और यातायात समस्या का स्थायी समाधान होगा।

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राजीव झा की रिपोर्ट

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