
बाल श्रम के अभिशाप से मुक्त होगा बिहार, बिहार सरकार का दावा
पटना : बिहार के उप मुख्यमंत्री-सह-गृहमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बाल श्रम किसी भी राज्य अथवा देश के लिए एक अभिशाप है। इस अभिशाप से केवल गरीब परिवारों के बच्चे ही अभिशापित हैं, लेकिन हम इस अभिशाप को वरदान में बदलेंगे। उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में हमारी सरकार बिहार को बाल श्रम से पूरी तरह मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। बच्चों के माता-पिता चाहे जितने भी गरीब हों, उनके बच्चों को शिक्षा से जोड़ा जाएगा।

उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी गुरुवार को श्रम संसाधन एवं प्रवासी श्रमिक कल्याण विभाग और बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग द्वारा “बाल श्रम के रोकथाम के लिए जा रहे प्रयास व बाल श्रम उन्मूलन, विमुक्ति एवं पुनर्वास” विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे।

बच्चों को बाल श्रम से मुक्ति सरकार का दायित्व
राजधानी के दशरथ मांझी श्रम एवं नियोजन अध्ययन संस्थान में आयोजित इस कार्यशाला में श्रम संसाधन विभाग व बिहार बाल श्रम आयोग के सदस्यों के अलावा अन्य राज्यों के श्रम विभाग,बिहार सरकार के शिक्षा, पंचायती राज,समाज कल्याण विभाग के साथ-साथ बाल श्रम उन्मूलन से जुड़े कई गैर सरकारी संगठन (एनजीओ) शामिल थे। इस कार्यशाला में बिहार बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार बादल और उपाध्यक्ष अरविंद कुमार भी मौजूद थे। जबकि श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनन्द बिहार को बाल श्रम से मुक्त करने के लिए उनके द्वारा किये जा रहे प्रयासों की रूपरेखा रखी। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि बच्चों का भविष्य गढ़ने के लिए शिक्षा के अलावा और कोई रास्ता नहीं है। यह शर्मनाक है कि जिस उम्र में बच्चों को स्कूल और खेल के मैदान में होना चाहिए, उस उम्र में बच्चों को कमाई के लिए मजदूरी करनी पड़ रही है। जबकि यह सरकार और समाज का दायित्व है कि ऐसे बच्चों को बालश्रम से मुक्त कराकर उन्हें स्कूलों में दाखिल कराया जाए, ताकि उनका भविष्य संवारा जा सके। उन्होंने पुलिस अधिकारियों से भी कहा कि बाल श्रम करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग चलायेगा विशेष अभियान
इस मौके पर बिहार राज्य बाल श्रमिक आयोग के अध्यक्ष अशोक कुमार बादल ने बाल श्रम को एक गंभीर समस्या बताते हुए कहा जब तक हर बच्चा स्कूल नहीं जाएगा, खेलेगा नहीं और अपने सपनों को पूरा नहीं करेगा, तब तक विकसित भारत और उन्नत बिहार की कल्पना अधूरी रहेगी। इसके लिए आयोग ने प्रखंड और पंचायत स्तर तक कार्यबल गठित कर बाल एव किशोर श्रमिकों का पुनर्वास सुनिश्चित की जा रही है। जबकि आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद कुमार ने कहा कि 14 वर्ष से कम उम्र के बच्चों से काम कराना कानूनन अपराध है, लेकिन गरीबी और अशिक्षा के बिहार में यह समस्या बनी हुई है। इसे समाप्त करने के लिए आयोग बाल श्रम मुक्त बिहार के संकल्प के साथ सक्रिय अभियान चला रहा है।
बाल श्रम बिहार ज्वलंत विषय, बाधित होता है बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास
इससे पूर्व कार्यशाला को संबोधित करते हुए श्रम संसाधन विभाग के सचिव दीपक आनन्द ने कहा कि बाल श्रम बिहार की एक ज्वलंत विषय है। जो बच्चों का सम्पूर्ण भविष्य बर्बाद कर देती है। इससे बच्चों का शारीरिक और मानसिक विकास को बाधित करता है। दीपक आनन्द ने कहा कि वर्ष 2024-25 में उनके विभाग के धावादल नेकुल 1213 को बाल श्रम के दलदल से मुक्त कराया है। जबकि मौजूदा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अबतक कुल 581 बच्चों को मुक्त कराया जा चुका है।
ये भी पढ़े : दरभंगा में कल होगा उपमुख्यमंत्री का जनता दरबार : जमीन संबंधित मामलों का होगा निपटारा, करेंगे जन संवाद
Highlights




