आलोक मेहता के ठिकानों पर ED की छापेमारी, 100 करोड़ से जुड़ा है मामला…

पटना: शुक्रवार की अहले सुबह बिहार में ED की टीम ने एक साथ 16 ठिकानों पर छापेमारी शुरू की। ईडी की छापेमारी की जानकारी मिलने के बाद पूरे बिहार में हड़कंप मच गया। ईडी की टीम ने शुक्रवार को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव के खास करीबी और बिहार सरकार में पूर्व मंत्री आलोक मेहता के 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी शुरू की है। बताया जा रहा है कि छापेमारी वैशाली शहरी विकास कोआपरेटिव बैंक में हुए करीब 100 करोड़ रूपये के घोटाले से जुड़ा है। बताया जा रहा है कि आलोक मेहता का परिवार इस बैंक से जुड़ा हुआ है और इस मामले में घोटाले में भी आलोक मेहता के परिवार का हाथ बताया जा रहा है।

पांच करोड़ रूपये का घोटाला पहुंचा 100 करोड़

शुरुआती दौर में पांच करोड़ रूपये के घोटाले की खबर आई थी जिसके बाद आरबीआई ने इस बैंक के वित्तीय लेन देन पर जून 2023 में रोक लगा दी थी। मामले की जांच के दौरान घोटाले का रकम अब 100 करोड़ जा पहुंचा है। बताया जा रहा है कि बैंक के हजारों निवेशकों के पैसे फर्जी लोन के जरिये चपत लगा दी गई।

मामले में खुलासा हुआ है कि आलोक मेहता के परिवार से जुड़ा लिच्छवी कोल्ड स्टोरेज प्राइवेट लिमिटेड और महुआ कोआपरेटिव कोल्ड स्टोरेज ने लोन के नाम पर साथ करोड़ रूपये का चूना लगाया साथ ही फर्जी कागजातों के सहारे बैंक प्रबंधन ने ही 30 करोड़ रूपये के लोन की निकासी कर ली। दोनों कंपनियों ने बैंक में जमा गारंटी के नाम पर साथ करोड़ रूपये लोन की निकासी की थी।

2012 में भी उठा था सवाल

वैशाली शहरी विकास कोआपरेटिव बैंक पर वर्ष 2015 में भी घोटाला का सवाल उठा था। उस वक्त आलोक मेहता ने खुद को बैंक के प्रबंधन से अलग कर बैंक की कमान अपने पिता को सौंप दी थी। मामले में आलोक मेहता के पिता तुलसीदास मेहता पर कार्रवाई भी हुई थी। उस वक्त भी आरबीआई ने बैंक के वित्तीय लेनदेन पर रोक लगा दी थी। लेकिन तब मामला सुलझा लिया गया था। अब यह बैंक एक बार फिर से विवादों के घेरे में है और इस बैंक पर करीब 100 करोड़ के घोटाला का आरोप लगा है।

35 वर्ष पहले हुई थी शुरुआत

वैशाली शहरी विकास कोआपरेटिव बैंक की शुरुआत आलोक मेहता के पिता तुलसीदास मेहता ने आज से करीब 1989 में की थी। उनके पिता के राजनीतिक रसूख की वजह से बैंक को आरबीआई से 1996 में लाइसेंस मिल गया था। आलोक मेहता 1995 में बैंक के अध्यक्ष बने जो कि 2012 तक बने रहे। 2012 में आलोक मेहता के पिता इस बैंक के चेयरमैन बने। 2015 में बैंक के ऊपर घोटाले का आरोप सुलझाने के बाद बैंक का जिम्मा आलोक मेहता के भतीजा संजीव को दे दिया गया।

वर्तमान चेयरमैन ने आलोक मेहता को बताया आरोपी

बैंक में गड़बड़ी का मामला सामने आने के बाद जमा पूंजी बैंक में रखने वाले लोगों ने जब वर्तमान अध्यक्ष संजीव पर दबाव बनाना शुरू किया तो संजीव ने सारा ठीकरा बैंक के पूर्व अध्यक्ष एवं बिहार सरकार में पूर्व मंत्री आलोक मेहता के मत्थे फोड़ दिया। बताया जा रहा है कि आलोक मेहता के अध्यक्ष रहते हुए ही घोटाले की स्क्रिप्ट लिखी गई थी और उनके कार्यकाल में ही दोनों कंपनियों के नाम से बड़ी राशि का लोन पास किया गया साथ ही सारे नियमों को ताक पर रख कर आलोक मेहता के परिवार के सदस्यों ने फर्जी कागजात जमा कर करीब 30 करोड़ रूपये की निकासी कर ली थी।

दो मामला दर्ज

वैशाली शहरी विकास कोआपरेटिव बैंक पर घोटाले का आरोप लगने के बाद अब इसकी आंच पूर्व मंत्री आलोक मेहता तक पहुंचने लगी है। बताया जा रहा है कि बैंक के स्थापना से अब तक बैंक के प्रबंधन का जिम्मा सीधे सीधे आलोक मेहता के परिवार के पास ही रहा है। साथ ही दोनों कंपनी भी आलोक मेहता के परिवार से ही जुड़ा है।

घोटाले की आंच जब 2015 में उठने लगी थी उससे पहले ही आलोक मेहता ने खुद को बैंक के साथ ही दोनों कंपनी से भी अलग कर लिया था और खुद को बचाने की कोशिश की थी। लेकिन अब यह मामला सीधे सीधे आलोक मेहता से जुड़ने लगा है और अब ईडी इस मामले में कार्रवाई शुरू कर दी है और आज आलोक मेहता से जुड़े 16 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी कर रही है।

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