Bihar: बिहार की राजनीति फिलहाल चर्चा में है। चर्चा का विषय है CM Nitish Kumar के राज्यसभा जाने की इच्छा और नामांकन। सीएम नीतीश के इस फैसले से जेडीयू कार्यकर्ताओं में काफी रोष देखेने को मिल रहा है। बिहार में जेडीयू भाजपा को इसका दोषी मान रही है जिसके बाद पीएम मोदी का पुरजोर विरोध देखने को मिल रहा है। पीएम मोदी के पोस्टर पर कालिक पोती जा रही है।
पार्टी कार्यकर्ताओं में देखी जा रही है नाराजगी
बिहार के CM Nitish Kumar को राज्यसभा भेजे जाने को लेकर बिहार की सियासत गर्म हो गई है। कल ही मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने विधानसभा में राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल किया है। इसके बाद से ही पार्टी कार्यकर्ताओं और कई नेताओं में नाराजगी देखने को मिल रही है।
कुछ नेताओं को इस फैसले से इतना दुख हुआ कि वे कैमरे के सामने फूट-फूट कर रोते हुए भी नजर आए। अब इस फैसले का विरोध सड़कों पर भी दिखाई देने लगा है। पटना की सड़कों पर पोस्टर और पोस्टकार्ड के जरिए CM Nitish Kumar से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की जा रही है।
इन पोस्टरों में लिखा गया है —
“नीतीश के सेवक कर रहे पुकार, नेता करें अपने निर्णय पर पुनः विचार। लोकतंत्र में जनता के जनादेश और आत्मसम्मान का हनन अब नहीं होगा।”
यह पोस्टर “नीतीश के सेवक पोस्टकार्ड लेखन अभियान” के तहत लगाए गए हैं, जिन्हें जदयू परिवार और समर्थकों की ओर से लगाया गया बताया जा रहा है।
नाराजगी अब सड़कों तक पहुंच गई है…
जदयू छात्र नेता कृष्णा पटेल ने इस पूरे मामले पर कहा कि वे नीतीश कुमार का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें लगता है कि कहीं न कहीं मुख्यमंत्री को इस फैसले के लिए मजबूर किया गया है। उन्होंने कहा कि इसको लेकर पूरे बिहार में पोस्टकार्ड लेखन अभियान चलाया जाएगा और मुख्यमंत्री से अपने फैसले पर पुनर्विचार करने की अपील की जाएगी।
फिलहाल मुख्यमंत्री के राज्यसभा जाने को लेकर उठी यह नाराजगी अब सड़कों तक पहुंच गई है और सियासी हलकों में इसको लेकर चर्चा तेज हो गई है।


