Dhanbad– भोजपुरी, मगही भाषा को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा दिए जाने के साथ ही झारखंड में राजनीति तेज हो गई है. विरोध के स्वर उठने लगे है. आज झारखण्डी-मूलवासी के बैनर तले भोजपुरी, मगही के सवाल पर पुटकी प्रभु चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का पुतला दहन किया गया.
मौके पर वक्ताओं ने कहा कि धनबाद जिले में भोजपुरी-मगही की कोई बस्ती नहीं है, सिर्फ कुछ गिने चुने लोग है, जो बिहार से आकर झारखंड में अपना गुजारा करते हैं. फिर किस आधार पर इन भाषाओं को शामिल किया गया.
वक्ताओं ने क्षेत्रीय भाषा घोषित करने के पहले सरकार से भाषा आधारित सर्वेक्षण करवाने की मांग की और कहा कि एक बार भाषावार सर्वे हो जाय तब ही किसी भाषा को क्षेत्रीय भाषा का दर्जा दिया जाय. यदि हम पर जबरन मगही और भोजपुरी को थोपा जाता है तो इसे बर्दास्त नहीं किया जाएगा. इसके खिलाफ जोरदार आन्दोलन की शुरुआत होगी. सरकार इससे निपटने की तैयारी कर ले.
यहां बता दें कि पिछली बार मगही भोजपुरी को क्षेत्रीय भाषा में शामिल नहीं किये जाने पर इसका विरोध किया गया था. और इसे क्षेत्रीय भाषा की सूची में शामिल करने की मांग उठी थी. लेकिन अब मगही भोजपुरी को शामिल करने के साथ इसका विरोध शुरु हो चुका है. देखना होगा अब विवाद का क्या समाधान निकाला जाता है.
रिपोर्ट- राजकुमार
भोजपुरी-मगही के विरोध में झरिया में जन आक्रोश रैली, हेमंत सोरेन का पुतला दहन