डिजीटल डेस्क : Supreme Bail – मनीष सिसोदिया 530 दिनों बाद 10-10 लाख के बेल बांड पर आएंगे जेल से बाहर। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की आबकारी नीति और धन शोधन से जुड़े अहम मामले में शुक्रवार को दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया को जमानत दे दी है।
दो जजों की पीठ आज दिल्ली के पूर्व डिप्टी सीएम की जमानत याचिका पर फैसला सुनाया। सर्वोच्च न्यायालय ने उन पर शर्त लगाते हुए निर्देश दिया कि वे अपना पासपोर्ट जमा कर दें।
उन्हें हर सोमवार को थाने में गवाही देनी होगी। शीर्ष अदालत ने 10-10 लाख के बेल बॉन्ड पर सिसोदिया को जमानत दी है। अब वो जेल से बाहर आ जाएंगे। इसके साथ ही कोर्ट ने उनसे कहा कि वे गवाहों को प्रभावित करने की कोशिश न करें। कोर्ट ने उन्हें सचिवालय जाने की इजाजत दी है।
न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने सुनवाई के बाद गत 6 अगस्त को फैसला सुरक्षित रख लिया था।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा – जमानत नियम है और जेल अपवाद, 17 महीने में मुकदमा तक शुरू नहीं हुआ
शीर्ष अदालत ने खुलकर कहा कि ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट को यह समझना चाहिए कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है। बिना ट्रायल पूरा किए किसी को जेल में रखकर सजा नहीं दी जा सकती है। सिसोदिया को जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा सिसोदिया लंबे समय से जेल में बंद हैं।
इस प्रकार वह शीघ्र सुनवाई के अधिकार से वंचित हुए हैं।वक्त आ गया है कि निचली अदालतें और हाई कोर्च इस सिद्धांत को समझें कि जमानत नियम है और जेल अपवाद है। मनीष सिसोदिया को जमानत के लिए निचली अदालत भेजना न्याय का अपमान होगा इसलिए हम उन्हें जमानत दे रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि सिसोदिया 17 महीने से हिरासत में हैं और अभी तक मुकदमा शुरू नहीं हुआ है, जिससे उन्हें त्वरित सुनवाई के अधिकार से वंचित होना पड़ रहा है।
इन मामलों में जमानत मांगने के लिए उन्हें ट्रायल कोर्ट में भेजना न्याय का मखौल उड़ाना होगा। इसके बाद कोर्ट ने निर्देश दिया कि सिसोदिया को 10 लाख रुपये के निजी मुचलके और इतनी ही राशि के दो जमानतदारों पर जमानत पर रिहा किया जाए।

Supreme Bail : मनीष सिसोदिया इस मामले में गए थे जेल…
दिल्ली के पूर्व मंत्री मनीष सिसोदिया को रद्द हो चुकी दिल्ली आबकारी नीति 2021-22 बनाने, उसके कार्यान्वयन में कथित अनियमितताओं में संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। पहले 26 फरवरी, 2023 को केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने गिरफ्तार किया था।
बाद में कई अलग-अलग आरोपों के तहत प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी ने भी सिसोदिया पर शिकंजा कसा। उन्होंने 28 फरवरी 2023 को दिल्ली कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया।
सिसोदिया ने यह कहते हुए जमानत मांगी थी कि वह 17 महीने से हिरासत में हैं और उनके खिलाफ मुकदमा अभी तक शुरू नहीं हुआ है। ईडी और सीबीआई ने उनकी जमानत याचिकाओं का विरोध किया था।
सिसोदिया के वकील और आप नेता संजय सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश, बोले – ये बड़ी खबर है
जमानत मिलने के बाद मनीष सिसोदिया के वकील ऋषिकेश कुमार ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को जमानत दी है और ये ऐतिहासिक फैसला है। मनीष सिसोदिया 17 महीने की जेल काट चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जैसा ईडी ने कहा था कि ये ट्रायल 6-8 महीने में खत्म हो जाएगा, वो होता नहीं दिख रहा।
ईडी के आरोप को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मनीष सिसोदिया ने ट्रायल में देरी नहीं की।
इसी क्रम में आम आदमी पार्टी के नेता संजय सिंह ने कहा कि ये आम आदमी पार्टी और दिल्ली के लोगों के लिए बहुत बड़ी राहत है। अरविंद केजरीवाल और सत्येंद्र जैन के लिए न्याय का रास्ता जल्द ही खुलेगा। संजय सिंह ने आगे कहा कि जो 17 महीने मनीष सिसोदिया के बर्बाद हुए उसका हिसाब क्या देश के प्रधानमंत्री देंगे?
साथ ही यह भी सवाल दागा – जो 17 महीने दिल्ली के बच्चों के बर्बाद हुए, उसका हिसाब कौन देगा? संजय सिंह ने कहा कि भाजपा का मकसद केवल एक है कि विपक्ष के नेताओं को पकड़ कर जेल में डालो। मनीष सियोदिया के घर से एक रुपया बरामद नहीं हुआ और कोई प्रोपर्टी और गहना नहीं मिला फिर भी आपने 17 महीने जेल में रखा।
ईडी हमेशा समय मांगती रही और मामले को टरकाती रही और आज उन सब पर विराम लगा है ये हमारे लिए बहुत बड़ी खबर है।
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