गोफ और जहरीली गैस के बीच रहने को मजबूर रैयत-गैर रैयत, बीसीसीएल लोगों के पुनर्वास पर नहीं है गंभीर, लोगों में आक्रोश

बाघमाराः बीसीसीएल के अग्निप्रभावित, डेंजर जोन घोषित क्षेत्र में आज भी हजारों लोग गोफ, भू-धसान और जहरीली गैस के बीच रहने को मजबूर है. पिछले दो महीने के अंदर चार से पांच बड़ी गोफ, भूधसान की घटना घट चुकी है. वहीं 17 सितम्बर को बीसीसीएल कुसुंडा क्षेत्र के गोन्दुडीह आउटसोर्सिंग परियोजना में 3 महिलाएं आचनक बने गोफ में समा जाने से अपनी जान तक गंवा चुकी है.

इसके आलवे जोगता 11 नंबर हरिजन बस्ती में 15 अगस्त और 8 अक्टूबर को गोफ बनने से 4 घर जमींदोज हो गया. 15 अगस्त की घटना में दो मासूम बचा आचनक बने गोफ में समा गया था. हालांकि दोनों की जान बचाई गई. इसके आलवे तेतुलमुड़ी में मस्जिद के बगल में गोफ बनी थी. ऐसे अनेक घटना होने के बाद भी भू-धसान क्षेत्र के लोगों को सुरक्षित स्थान में बसाने को लेकर जिला प्रशासन और बीसीसीएल गंभीरता नही दिखा रहे है. यही कारण है कि लोगों में बीसीसीएल और जिला प्रशासन के प्रति आक्रोश है.

वहीं भूधसान क्षेत्र में रहने वाले लोगों ने कहा कि मजबूर है इसलिए जहरीली गैस के बीच रह रहे हैं. डर लगा रहता है कि कब जमीन में समा जाए. सभी दहशत में रहते है. बीसीसीएल सर्वे करती है. उसके बाद चली जाती है. मुआवजा और बसाने का कोई काम नहीं कर रही है. वहीं जोगता की हाल की घटना को लेकर जेएमएम नेता ने कहा कि बीसीसीएल पर एफआईआर होना चाहिए.

रिपोर्ट- सूरजदेव मांझी

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