क्या पैक्स मॉडल बदल देगा बिहार के किसानों की किस्मत… जानिए मंत्री ने क्या कहा

Patna: बिहार समेत पूर्वी भारत में किसान संगठनों को सशक्त बनाने के लिए नीति आयोग ने सहकारिता विभाग के सहयोग से होटल पनाश कौटिल्य में दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया है। गुरुवार को इसका शुभारंभ करते हुए सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने कहा कि सहकारिता के माध्यम से किसानों की आय बढ़ेगी। राज्य के किसान संगठन डेयरी, मछली, शहद, बागवानी जैसे कई काम सहकारिता के माध्यम से शुरू कर मुनाफा कमा सकते हैं।

सरकार पैक्सों को सशक्त कर रही है   

उन्होंने बताया कि राज्य की प्राथमिक कृषि साख समितियां (पैक्स) कई तरह के काम से मुनाफा कमा रही हैं। सरकार पैक्सों को सशक्त कर रही है। पैक्सों को बहुउद्देश्यीय बनाने का प्रयास किया जा रहा है। पैक्सों में कॉमन सर्विस सेंटर, प्रधानमंत्री किसान समृद्धि केंद्र जैसी सुविधाएं शुरू की गई हैं। सस्ती दवाइयां भी लोगों तक पहुंचाई जा रही हैं। सभी गांवों में डेयरी सहकारी समितियों का गठन किया जा रहा है। हमें खेती के क्षेत्र में भी सहकारिता की संभावनाओं पर विचार करने की जरूरत है। हम गुजरात की तरह बिहार में भी सहकारिता से किसानों की आमदनी बढ़ा सकते हैं। हमें पैक्सों के जरिए मोटे अनाजों की खेती को भी बढ़ावा देना चाहिए।

जापान और डेनमार्क जैसे देश सहकारिता के माध्यम से आगे बढ़े हैं

इस दौरान नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद ने कहा कि किसान समूहों को सशक्त करने के लिए यह कार्यशाला आयोजित की गई है। जापान और डेनमार्क जैसे देश सहकारिता के माध्यम से आगे बढ़े हैं। हमें भी देश में सहकारिता मॉडल को विकसित करना होगा, जिससे कमजोर तबके का तेजी से विकास होगा।

इस मौके पर नीति आयोग की प्रोग्राम डायरेक्टर डॉ. राका सक्सेना ने कहा कि बिहार में छोटे जोत वाले किसानों की संख्या काफी अधिक है। देश में एक हेक्टेयर से कम भूमि वाले सीमांत किसानों की संख्या करीब 60 प्रतिशत है, जबकि बिहार में ऐसे किसानों की संख्या लगभग 87 प्रतिशत है। ऐसे में जरूरत है कि हम ऐसे मॉडल विकसित करें, जिससे यहां की कृषि और किसानों का विकास हो। पैक्सों के जरिए किसानों की आय बढ़ाने में बड़ी मदद मिल सकती है।

इसमें सहकारिता विभाग के निबंधक, सहयोग समितियां, रजनीश कुमार सिंह ने कहा कि बिहार में 8463 पैक्स हैं, जिसमें 1.39 करोड़ सदस्य जुड़े हैं। यह संख्या हमारी आबादी का 10 प्रतिशत से ज्यादा है। इन्हें व्यवसायिक गतिविधियों से जोड़ा जाए तो आने वाले समय में बिहार की तस्वीर बदली जा सकती है। हम पैक्सों के जरिए कोशिश कर रहे हैं कि गांव के लोगों को गांव में ही रोजगार मिले।

कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत नीति आयोग की बबीता सिंह ने किया, वहीं इस मौके पर नाबार्ड, मुंबई से आए डिप्टी मैनेजिंग डायरेक्टर गोवर्धन सिंह रावत, डॉ. राजेंद्र प्रसाद कृषि विश्वविद्यालय (आरपीसीयू), पूसा के कुलपति डॉ. पी. एस. पांडेय समेत कई अन्य ने अपनी बातें रखीं। इस दौरान अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, मणिपुर, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम और त्रिपुरा से आए प्रतिनिधि मौजूद थे।

कार्यशाला के तकनीकी सत्र में पैक्सों की क्षमता बढ़ाने और उन्हें विभिन्न तरह के व्यवसाय से जोड़ने को लेकर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे।

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