आज से शारदीय नवरात्र शुरू

जानिए क्या है मुहूर्त और कैसे करें पूजा

RANCHI: आज से शारदीय नवरात्र शुरू हो गया है.

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि को मां शैलपुत्री की विधिवत पूजा की जाती है

और कलश स्थापना की जाती है.

कलश स्थापना का सबसे अच्छा समय सुबह 06 बजकर 28 मिनट

से लेकर सुबह 08 बजकर 01 मिनट तक है.

इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त में भी कलश स्थापित किया जा सकता है.

सुबह 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 36 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा

सुबह 11 बजकर 48 मिनट से लेकर 12 बजकर 36 मिनट तक अभिजीत मुहूर्त रहेगा.

पुराणों में कलश को भगवान गणेश का स्वरूप माना गया है

इसलिए नवरात्र के पहले दिन ही पूजा की जाती है.

नवरात्र के नौ दिनों में शैलपुत्री, ब्रह्माचारिणी, चंद्रघंटा, कुष्मांडा,

स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की पूजा होती है.

शारदीय नवरात्र: पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है.

शैलपुत्री का अर्थ होता है हिमालाय की पुत्री.

शैल का मतलब हिमालय होता है. यह माता का पहला अवतार है.
ऐसा है मां का स्वरूप
मां शैलपुत्री पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं. मां के एक हाथ में

त्रिशूल और दूसरे हाथ में कमल का पुष्प है.

शारदीय नवरात्र: यह नंदी नामक बैल पर सवार संपूर्ण हिमालय पर विराजमान हैं.

इसलिए इनको वृषोरूढ़ा और उमा के नाम से भी जाना जाता है.

यह वृषभ वाहन शिवा का ही स्वरूप हैं.

घोर तपस्या करने वाली शैलपुत्री समस्त वन्य जीव-जंतुओं की रक्षक भी हैं.
मां शैलपुत्री के पूजा मंत्र
वन्दे वांछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखरम्।
वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्।।
पूणेन्दु निभां गौरी मूलाधार स्थितां प्रथम दुर्गा त्रिनेत्राम्॥
पटाम्बर परिधानां रत्नाकिरीटा नामालंकार भूषिता॥
प्रफुल्ल वंदना पल्लवाधरां कातंकपोलां तुंग कुचाम् ।
कमनीयां लावण्यां स्नेमुखी क्षीणमध्यां नितम्बनीम् ॥
या देवी सर्वभूतेषु शैलपुत्री रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै, नमस्तस्यै, नमस्तस्यै नमो नम:।
ओम् शं शैलपुत्री देव्यै: नम:।

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