तीसरा टर्म पक्का लेकिन यूपी में भाजपा को झटका लगने की आशंका, चिंता में रणनीतिकार

डिजीटल डेस्क : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में लगातार तीसरी बार इस लोकसभा चुनाव में फतह करने की इरादे से उतरी भाजपा को उसी यूपी में झटका लगने की आशंका ने चिंतित कर दिया है, जिस यूपी के बारे में पार्टी के रणनीतिकार भी मानते हैं कि दिल्ली की सत्ता का रास्ता वहीं से गुजरता है। पहले चरण के मतदान के प्रचार खत्म होने से ऐन पहले आए ओपिनियन पोल ने इन रणनीतिकारों को चौंकाया है और अपनी रणनीति पर यूपी में परेशानी पैदा करने वाले आशंकित सीटों पर नए सिरे से पेंच कसने के लिए विवश किया है। इस बारे में तत्काल मंथन भी शुरू होने की खबर है ताकि समय रहते उन क्षेत्र में पार्टी का बूथ प्रबंधन से लेकर पूरा चुनाव तंत्र नए सिरे से चाकचौबंद किया जा सके। यह आकस्मिक चुनावी प्रबंधन भाजपा खेमे के लिए कितना राहत देने वाला रहेगा, यह तो 4 जून को नतीजे घोषित होने के बाद ही सामने आएगा।

पश्चिम में एक और पूर्वांचल में 7 सीटों पर जताया गया अंदेशा

बताया जा रहा है कि इस ओपिनियन पोल के आधार और सर्वे सैंपल पर भाजपा रणनीतिकारों ने बारीकी से ध्यान दिया है और उसके बाद ही उनका माथा ठनका है। इसमें उन्हें पीएम मोदी के तीसरे टर्म के लिए देश भर से बहुमत मिलता दिखाया गया जबकि यूपी में कुल करीब एक दर्जन सीटों पर झटका लगने का अंदेशा जताया गया है। इसमें भी सबसे ज्यादा झटका पूर्वी यूपी यानी पूर्वांचल में लगने का अंदेशा जताया गया है जहां 7 सीटों पर भगवा परचम लहराने में दिक्कत वाली स्थिति आंकी गई है। इसकी तुलना में रालोद के साथ गठबंधन के बाद पश्चिमी यूपी में हालात संतोषजनक मिले हैं जहां सिर्फ एक सीट पर परेशानी का अंदेशा जताया गया है जबकि अवध-ब्रज क्षेत्र में चार सीटों पर भी ऐसे ही खतरे का अंदेशा जताया गया है। इसके बाद से यूपी से 80 से 80 सीटों पर परचम फहराने के मिशन में लगे रणनीतिकारों का चिंतित होना लाजिमी है। वह इन सीटों के लिए तत्काल कमजोर कड़ियों को दुरूस्त करने में जुट गए हैं।

पीएम मोदी और सीएम मोदी की सीटें पूर्वांचल में ही

यूपी में पूर्वांचल भाजपा के लिए काफी अहम है क्योंकि यहीं से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ आते हैं। यही नहीं, केंद्र के तीन मंत्री और यूपी सरकार के 13 मंत्री भी इसी क्षेत्र से आते हैं। पूर्वांचल में कुल 21 जिले हैं और 26 लोकसभा सीटें आती हैं।  यहां जिन इलाकों में भाजपा को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ सकता है तो उन क्षेत्रों की सियासत जातीय समीकरण के इर्द-गिर्द सिमटी हुई है। बावजूद इसके यहां की राजनीति पर जाति-समीकरण का खासा प्रभाव देखते हुए ही भाजपा ने अपना दल, निषाद पार्टी और सुभासपा ने तालमेल कर रखा है।

सर्वे में कांग्रेस को राहत, रायबरेली से उम्मीद

भाजपा के रणनीतिकार चुनाव से ऐन पहले ओपिनियन पोल को अहम फीडबैक मान रहे हैं लेकिन आधिकारिक तौर पर तत्काल इस पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे। इस सर्वे के मुताबिक, तमाम जोड़-तोड़ और दलबदल के बाद हाशिए पर समझी जा रही कांग्रेस के लिए भी राहत की बात यह है कि उसका भी खाता खुलेगा जबकि समाजवादी पार्टी को भी भाजपा के दावों के विपरीत कुछ संतोषजनक सीटें मिल सकती हैं। इस सर्वे के आधार पर बताया जा रहा है कि कैराना, मैनपुरी, प्रतापगढ़, कन्नौज, अंबेडकरनगर, लालगंज, घोसी, आज़मगढ़, जौनपुर, मछलीशहर और गाजीपुर लोकसभा सीटों पर समाजवादी पार्टी अच्छी स्थिति में हैं जबकि रायबरेली सीट पर कांग्रेस सेफ रह सकती है।

पीएम मोदी के तीसरे टर्म के लिए यूपी से 68 सीटों का अनुमान

इस सर्वे के मुताबिक भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता की हैट्रिक लगाती हुई नजर आ रही है लेकिन यूपी के 80 लोकसभा सीटों में एनडीए 68 पर कब्जा जमाती बताई गई है। उसमें भी 64 सीटें भाजपा और 4 सीटें सहयोगी दलों को मिलती बताई गई हैं जबकि इंडिया गठबंधन को 12 सीटें मिलती बताई गई हैं। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा यूपी की 16 सीटें पर परचम फहराने से चूक गई थी। उसमें 8 सीटें पश्चिमी यूपी और 6 सीटें पूर्वांचल की थीं। उसके बाद साल 2022 में हुए यूपी विधानसभा चुनाव में भी भाजपा को इन्हीं दोनों इलाकों में भारी नुकसान उठाना पड़ा था। इस बार पूर्वांचल में राजभर का दांव कामयाब होता नजर नहीं आ रहा है और सर्वे में घोसी सीट पर ओपी राजभर के बेटे अरविंद राजभर के लिए भी अंदेशा जताया गया है। इसके अलावा मछलीशहर और प्रतापगढ़ सीट भी भाजपा के हाथों से खिसकने का अंदेशा जताया गया है।

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