धनबादः धनबाद, जिला परिषद् बोर्ड की बैठक काफी हंगामेदार रही. एक समय तो लगभग सभी सदस्य उठकर आसन के सामने जमा होकर नारेबाजी करने लगें. सदस्यों का आरोप था कि बैठक में जो प्रस्ताव पारित किया जाता है, उसका क्रियान्वयन नहीं किया जाता, पारित प्रस्तावों को फिर से सूची में डाल कर सदन का समय बर्बाद किया जाता है.
सदस्यों ने अपने आरोपों के समर्थन में कई उदाहरण गिनाए, सदस्यों के तोबड़तोड़ आरोपों से आसन परेशान दिखा, आसन के पास कोई उतर दिख नहीं रहा था.

सदस्यों का कहना था कि अवधि विस्तार के बाद यह बोर्ड की अंतिम बैठक है, जबकि क्षेत्र में कोई काम नहीं हुआ. ऐसे में सदस्य किस प्रकार जनता का सामना करेंगे. 6 वर्ष से आय-व्यय का ब्योरा रखने की मांग की जा रही है, लेकिन आज तक टालमटोल किया जाता रहा.
सदस्यों ने हाथियों का उत्पात,बिजली की समस्या, प्राक्कलन बनाने के बाद भी टेंडर नहीं करना ,जिला परिषद् के सील किये गए भवनों को पिक एंड चूज के आधार पर खोलने सहित कई गंभीर आरोप आसान पर लगाए .
अशोक सिंह का कहना था कि पिछली ही बैठक में आई.एम.ए ,इंटक भवन,कांग्रेस ऑफिस को रेंट एकरारनामा कर भवनों को खोले जाने का निर्णय लिया गया था, लेकिन आई एम ए , इंटक भवन, कांग्रेस ऑफिस नहीं खोला गया. 12 अप्रैल ’21 को जिला परिषद् बोर्ड की बैठक में एक सात सदस्य की टीम बनाकर कांग्रेस ऑफिस के लिए भाड़ा निर्धारण सम्बन्धी स्वीकृति मांगी गई थी . इनमें चार सदस्यों ने अपनी स्वीकृति दे दी, बावजूद मामले को लटका दिया गया. बताया गया कि इसमें अधिवक्ता की राय जरुरी है. अशोक सिंह ने प्रश्न किया की अगर अधिवक्ता बहुचर्चित टेक्सटाइल मार्किट खोलने की राय दे सकते हैं, यूनियन क्लब खोलने की राय दे सकते है तो कांग्रेस भवन खोलने की राय में क्या अड़चन हो सकती है. अशोक सिंह ने जिला परिषद् की आवंटित दुकानों में मांस ,मदिरा आदि बेचने का भी आरोप लगाया. जबकि संतोष महतो ने कहा की हम 6 वर्षों में जनता को सड़क,बिजली,पानी नहीं दे पाए.
मौके पर प्रियका पाल, दुर्गा दास सहित लगभग 28 ज़िप सदस्य मौजूद रहें. काफी जद्दोजहद के बाद पहले से हर क्षेत्र के लिए पारित 20 लाख की योजना को त्वरित तरीके से पूरा करने का प्रस्ताव पारित हुआ. साथ ही जिला परिषद् को राशि उपलब्ध होने की स्थिति में हर क्षेत्र के लिए एक करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई,
रिपोर्टः राजकुमार


















