रांची: निजी संस्थानों में महिला कर्मियों के नाइट शिफ्ट में काम करने से संबंधित विधेयक को झारखंड सरकार चालू मानसून सत्र में वापस लेगी। इसके साथ ही इसी सत्र में ही राज्य सरकार पुराने विधेयक में संशोधन कर नया विधेयक भी लाएगी।
पुराने विधेयक में यह प्रविधान था कि फैक्ट्री प्रबंधन बिना महिला वर्कर की अनुमति के उनसे नाइट शिफ्ट में काम करा सकता है। नए विधेयक में इस व्यवस्था को बदलकर संबंधित महिला कर्मी की सहमति को अनिवार्य बनाया जाएगा। महिला कर्मी की सहमति के बिना उनसे नाइट शिफ्ट में काम नहीं कराया जा सकेगा।
श्रम विभाग के चीफ फैक्ट्री इन्सपेक्टर मनीष सिन्हा ने बताया कि वर्तमान में झारखंड में 46 हजार के करीब महिला वर्कर हैं। संशोधन के बद यह महिलाएं नाइट शिफ्ट में काम कर सकेंगी। पिछले वर्ष 3 अगस्त को झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र में झारखंड कारखाना विधेयक-2023 को मंजूरी मिली थी।
इसके तहत प्रविधान किया गया था कि राज्य के अंदर महिलाएं किसी कल-कारखाने में शाम सात बजे से सुबह के छह बजे तक काम कर सकेंगी। इसके बाद अनुमोदित विधेयक को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा गया था। जहां गृह मंत्रालय और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आपत्ति के साथ बिल को वापस भेज दिया। गृह मंत्रालय ने आपत्ति में बताया था कि नाइट शिफ्ट में महिला वर्कर से काम लेने के लिए उसकी सहमति लेना जरूरी है।







