
Ranchi : पूर्व सीएम चंपाई सोरेन (Champai Soren) आज बीजेपी में शामिल होने जा रहे हैं। बीजेपी में शामिल होने से पहले चंपाई सोरेन ने News 22Scope से बात की। बातचीत के दौरान चंपाई ने बताया कि 18 अगस्त को मैने अपना दर्द सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया था कि मेरे दिल का दर्द क्या है।
मेरे पास अपना दर्द जाहिर करने के लिए कोई प्लेटफॉर्म नहीं है। जेएमएम सुप्रीमो शिबू सोरेन का स्वास्थ्य भी ठीक नहीं है जिन्हें हम अपनी दर्द बताएंगे। मैं तो जेएमएम से इस्तीफा देने के बाद संन्यास लेने वाला था पर कार्यकर्ताओं और जनता के समर्थन ने मुझे संन्यास लेने के मेरे फैसले को बदल दिया है। इसलिए मैंने फिर से सक्रिय रुप से राजनीति जारी रखने का निर्णय लिया।
Champai Soren: क्या फायदा देखकर आप बीजेपी में शामिल हुए
मेरा चुनाव से ज्यादा महत्व यहां के आदिवासी और मूलवासियों के अस्तित्व को बचाना है। राज्य के आदिवासियों का अस्तित्व संकट में आ गया है। मैने देखा कि मेरा यह दल नहीं है कि हम बांग्लादेशी घुसपैठियों की बात उठा सकता है। मैने देखा कि कैसे बीजेपी इस बात को प्रमुखता के साथ उठा रही है। यहीं सोचकर मैने बीजेपी ज्वाइन करने का मन बनाया।

आज संथाल परगना और झारखंड में जिस तरह से बांग्लादेशी घुसपैठियों का मुद्दा उठते जा रहा है उसको शायद मैं ठीक कर पाउं। यहीं मेरा बीजेपी में शामिल होने का मुख्य कारण है। मैंने स्टूडेंट समय से ही झारखंड के लिए काफी संघर्ष किया है। झारखंड के हर क्षेत्र में मैने अलग झारखंड के लिए आंदोलन किया।
आज राज्य में बांग्लादेशी घुसपैठिये जो घुस आए हैं उससे एक-एक गांव मिटते जा रहे हैं। इसलिए मैने सोचा कि झारखंड में आदिवासियों के अस्तित्व के लिए संघर्ष करुंगा।
क्या आप मानते हैं कि संथाल परगना में बांग्लादेशी घुसपैठिया हुआ है
अभी मेरे पास मेरे पास सथाल के दुमका, जामताड़ा, पाकुड़ से कई लोग मेरे से मिलने के लिए आए। उन्होंने बताया कि बांग्लादेशी घुसपैठियों की वजह से एक-एक गांव मिटते चले जा रहे हैं। अब तो आलम यह है कि उस गांव में आदिवासी खोजने से भी नहीं मिलेगा। ये कोई कहानी नहीं है। ये हकीकत है। संथाल में दर्जनों गांव मिटते जा रहे हैं। ये सब कोई और नहीं बल्कि वहां के स्थानीय कार्यकर्ताओं, स्टूडेंट्स ने बताया है। यही बात है कि मुझे बीजेपी से इस मुद्दे को सामने रखने का मौका मिलेगा।
कोल्हान टाइगर बूढा हो गया है
इस पर मैं कुछ नहीं कहना चाहता हूं। मै बस इतना कहूंगा कि उनकी जितनी उम्र हुई है उनसे ज्यादा तो मैंने संघर्ष किया है। वो हमारी उम्र क्या बताएंगे। टाटा जैसी बड़ी कंपनियों में मैंने आंदोलन कर राज्य के हजार-हजार लोगों को स्थानीय नौकरी कराया है।
जासूसी के मुद्दे पर क्या कहेंगे
जेएमएम इस स्तर पर गिर जाएगा मैंने कभी सोचा नहीं था। मेरा जीवन साफ है, अब अगर मेरे ऊपर ही कोई जासूसी कर रहा है तो इससे ज्यादा दुर्भाग्यपूर्ण कुछ और नहीं हो सकता है।
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