देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट को रक्षा मंत्रालय की सैद्धांतिक मंजूरी। मोहनपुर के तिलौना में 300 एकड़ भूमि चिन्हित, MSME को बढ़ावा।
BRAHMOS Missile Factory देवघर: केंद्रीय रक्षा मंत्रालय ने झारखंड के देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल निर्माण इकाई स्थापित करने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। गोड्डा सांसद डॉ. निशिकांत दुबे ने जानकारी दी कि उन्होंने 13 जनवरी को रक्षा मंत्री Rajnath Singh को पत्र लिखकर देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित करने का आग्रह किया था, जिस पर सकारात्मक पहल हुई है।
BRAHMOS Missile Factory : रणनीतिक दृष्टि से अहम बनेगा देवघर
डॉ. दुबे ने बताया कि दिवंगत रक्षा मंत्री Manohar Parrikar के मार्गदर्शन में Defence Research and Development Organisation ने देवघर हवाई अड्डे के विकास के लिए लगभग 220 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए थे। वर्तमान में यह हवाई अड्डा पूरी तरह संचालित है और रणनीतिक रूप से रक्षा उत्पादन व सैन्य संचालन के लिए उपयोगी साबित हो सकता है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत रक्षा उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। हालिया ऑपरेशन सिंदूर में BrahMos missile की प्रभावी भूमिका के बाद इसकी अंतरराष्ट्रीय मांग में भी तेजी आई है।
Key Highlights
देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री को रक्षा मंत्रालय की सैद्धांतिक मंजूरी
मोहनपुर के तिलौना में 300 एकड़ सरकारी भूमि पहले से चिह्नित
देवघर एयरपोर्ट के विकास में डीआरडीओ ने 220 करोड़ रुपये दिये
ब्रह्मोस की बढ़ती वैश्विक मांग से उत्पादन क्षमता विस्तार की तैयारी
MSME सेक्टर, रोजगार और औद्योगिक क्लस्टर को मिलेगा सीधा लाभ
BRAHMOS Missile Factory : मोहनपुर के तिलौना में 300 एकड़ भूमि चिह्नित
देवघर के मोहनपुर अंचल स्थित तिलौना और सिरसिया गांव के आसपास करीब 300 एकड़ सरकारी भूमि आठ वर्ष पूर्व ही चिन्हित की जा चुकी है। प्रस्तावित फैक्ट्री इसी क्षेत्र में स्थापित की जा सकती है। भूमि उपलब्धता और एयर कनेक्टिविटी को देखते हुए देवघर को रक्षा उत्पादन के लिए उपयुक्त माना जा रहा है।
BRAHMOS Missile Factory : MSME सेक्टर और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
देवघर में ब्रह्मोस मिसाइल फैक्ट्री खुलने से क्षेत्र में रक्षा उद्योग का नया केंद्र विकसित होगा। इससे स्थानीय युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण, कुशल रोजगार और औद्योगिक निवेश के अवसर मिलेंगे।
मैन्युफैक्चरिंग यूनिट स्थापित होने पर एमएसएमई सेक्टर को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। बड़ी फैक्ट्री के आसपास ऑटो पार्ट्स, प्रिसीजन इंजीनियरिंग और लॉजिस्टिक्स से जुड़े उद्योगों का क्लस्टर विकसित होने की संभावना है। इससे न केवल देवघर बल्कि पूरे झारखंड में औद्योगिक इकोसिस्टम मजबूत होगा।
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