नालंदा: नवरात्रि का आज दूसरा दिन है। पूरे देश में धूमधाम से नवरात्रि के अवसर पर मां दुर्गा की पूजा अर्चना की जा रही है। इस बीच हम आपको बताने जा रहे हैं नालंदा के एक मंदिर के बारे में जहां नवरात्रि के दौरान महिलाओं का प्रवेश वर्जित होता है। यह मंदिर है नालंदा के घोसरावां गांव के आशापुरी मंदिर की जहां नवरात्रि के दौरान महिलाओं का प्रवेश वर्जित होता है।
मंदिर के पुजारी ने बताया कि आशापुरी मंदिर तांत्रिक पूजा के लिए जाना जाता है। यहां की पूजा पद्धति सामान्य मंदिरों से अलग है। यहां साधक मन्त्र, यंत्र और तंत्र की विशेष साधना करते हैं। मंदिर के पुजारी और साधकों का मानना है कि तांत्रिक अनुष्ठान के दौरान अत्यधिक उग्र और तीव्र ऊर्जा का संचार होता है जिसे संभालना साधारण लोग खास कर महिलाओं के लिए संभव नहीं है।
पुजारियों और ग्रामीणों की मानें तो तांत्रिक परंपराओं के अनुसार इस मंदिर में महिलाओं का प्रवेश विशेष रूप से नवरात्रि के दौरान वर्जित है। क्योंकि इस समय साधनाएं अधिक शक्तिशाली और संवेदनशील होती हैं। यह मान्यता है कि तांत्रिक क्रियाओं के दौरान उत्पन्न ऊर्जा और शक्तियां महिलाओं पर विपरीत प्रभाव डाल सकती हैं। इसके अलावा मंदिर की पूजा पद्धति और तांत्रिक साधनाएं विशेष रूप से पुरुष साधकों के लिए निर्धारित की गयी है। यह सदियों से चली आ रही परंपरा आज भी बदस्तुर जारी है।
मां आशापुरी मंदिर की यह परंपरा सदियों पुरानी है, जो आज भी बिना किसी बदलाव के निरंतर जारी है। स्थानीय लोग इसे पूरी आस्था और श्रद्धा से निभाते हैं। उनका मानना है कि इस परंपरा का पालन करने से गांव और क्षेत्र में शांति, समृद्धि और सुरक्षा बनी रहती है। घोसरावां की आशापुरी मंदिर भारतीय तांत्रिक परंपराओं का एक अद्वितीय स्थल है, जहां तांत्रिक साधनाएं और पूजा पद्धतियां सदियों से उसी आस्था और विश्वास के साथ निभाई जा रही है। नवरात्रि के दौरान महिलाओं के प्रवेश पर लगी पाबंदी इस मंदिर की विशिष्टता को और बढ़ाती है। दशमी के दिन महिलाएं मंदिर जाकर भक्ति भाव से पूजा अर्चना करती है।
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नालंदा से राजा कुमार की रिपोर्ट
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