रांची: वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को कुल 25 सीटें मिलीं, जो कि पिछले चुनाव 2014 की तुलना में 12 सीटों की कमी दर्शाती है। 2014 में भाजपा को 37 सीटें मिली थीं। पिछले चुनाव में भाजपा ने 10 नई सीटें जीतीं, लेकिन 24 सीटें ऐसी थीं, जिन्हें उन्होंने पहले जीता था, पर अब हार गईं।
इस चुनाव में भाजपा को जिन 22 सीटों पर हार का सामना करना पड़ा, उनमें इचागढ़, खिजरी, गढ़वा, गुमला, गांडेय, गिरिडीह, घाटशिला, चतरा, पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम, झरिया, दुमका, पोटका, बगोदर, बेरमो, बोरियो, मधुपुर, मांडर, सिमडेगा, मनिका, सिसई और महगामा शामिल हैं। इनमें से 11 सीटें झामुमो और 6 सीटें कांग्रेस को मिलीं, जबकि शेष सीटों पर अन्य पार्टियों ने जीत दर्ज की।
भाजपा ने जिन 10 नई सीटों पर जीत हासिल की, उनमें तोरपा, मांडू, सिमरिया, पांकी, निरसा, हटिया, चंदनकियारी, भवनाथपुर, सारठ और डालटनगंज शामिल हैं। इनमें से पांच सीटें झारखंड विकास मोर्चा के पास थीं, जबकि तोरपा और मांडू झारखंड मुक्ति मोर्चा के पास थीं।
यहां तक कि भाजपा के जिन 10 नये उम्मीदवारों ने जीत हासिल की, उनमें से दो पहले से भाजपा में थे, और अन्य आठ उम्मीदवार चुनाव जीतने के बाद भाजपा में शामिल हुए थे। कांग्रेस ने 2019 के विधानसभा चुनाव में कुल 16 सीटें जीतीं, जो कि 2014 में जीती गई 6 सीटों की तुलना में काफी बढ़ोतरी दर्शाती है।
कांग्रेस की जीती हुई सीटों में पाकुड़, जरमुंडी, जामताड़, महगामा, रामगढ़, वरकागांव, बेरमो, झरिया, जमशेदपुर पश्चिमी, खिजरी, कोलिबिरा, लोहरदगा, मनिका, बरही और जगन्नाथपुर शामिल हैं। इस चुनाव ने भाजपा की स्थिति को चुनौती दी है, जिसमें पार्टी ने नई सीटों पर कब्जा किया, लेकिन अपनी अधिकांश पूर्व जीती हुई सीटें खो दीं।
इस चुनाव के परिणामों ने यह संकेत दिया है कि झारखंड में राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदल रहा है, और पार्टी को आने वाले समय में अपनी रणनीतियों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।


