डिजीटल डेस्क : कैंसर के मरीजों को सरकार की बड़ी राहत, सस्ती होंगी ब्रेस्ट-लंग कैंसर की 3 जरूरी दवाएं। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने दिवाली से ठीक पहले 70 वर्ष से अधिक आयु वाले नागरिकों को आयुष्मान योजना की सुविधा शुरू करने की घोषणा के साथ ही कैंसर के मरीजों को बड़ी राहत देने का भी कदम उठाया है।
इसी कड़ी कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 3 प्रमुख दवाओं की एमआरपी में कमी करने के आदेश भी सरकार ने दे दिए हैं।
देश में जरूरी दवाओं की कीमतों को नियंत्रण में रखने का काम करने वाली राष्ट्रीय औषिधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 3 दवा ट्रैस्टुजुमाब, ओसिमर्टिनिब और डुर्वालुमाब की एमआरपी (मैक्सिमम रिटेल प्राइस) को कम करने का निर्देश दिया है।
कैंसर की 3 दवाओं का एमआरपी कम करने का आदेश जारी
इसमें से ट्रैस्टुजुमाब का इस्तेमाल ब्रेस्ट (स्तन) कैंसर के इलाज में होता है, जबकि ओसिमर्टिनीब का उपयोग लंग (फेफड़ों के कैंसर) और डुर्वालुमाब का इस्तेमाल दोनों तरह के कैंसर के इलाज में किया जाता है।
कैंसर की इन दवाओं की कीमतों को कम करते हुए सरकार की ओर से कहा गया है कि आम लोगों को जरूरी दवाएं कम कीमत पर मिलती रहें, ये उसकी प्रतिबद्धता है। इसलिए एनपीपीए ने दवाओं की अधिकतम कीमत को कम करने के निर्देश दिए हैं।
हाल में इन दवाओं पर जीएसटी की दर कम की गई है, जबकि केंद्रीय बजट 2024-25 में इन दवाओं पर कस्टम ड्यूटी को भी खत्म कर दिया गया था। इसलिए सरकार का कहना है कि करों में कटौती का असर दवाओं की कीमत पर भी दिखना चाहिए और इसी क्रम में अब सरकार ने इनकी एमआरपी को कम करने का आदेश दिया है।

देश में लाखों में है कैंसर से ग्रसित मरीजों की संख्या, लगातार हो रही बढ़ोत्तरी…
केंद्रीय वित्त मंत्रालय के राजस्व विभाग ने कैंसर की इन 3दवाओं पर कस्टम ड्यूटी पहले ही खत्म कर दी है। उसके लिए सरकार ने हाल में इन दवाओं पर जीएसटी की दर 12 प्रतिशत से घटाकर 5 प्रतिशत की। इसलिए कंपनियों को इसकी एमआरपी 10 अक्टूबर 2024 से ही कम करनी थी, क्योंकि इसकी नई एमआरपी उसी दिन से लागू मानी जाएगी।
उत्पादकों को एमआरपी कम करने और डीलरों, राज्य औषधि नियंत्रकों और सरकार को मूल्य परिवर्तन की जानकारी देने का निर्देश भी दिया गया है। एक अध्ययन के मुताबिक भारत में कैंसर के मरीजों की संख्या 14 लाख से भी अधिक हो चुकी है।
इसमें हर साल बढ़ोतरी का ट्रेंड है। साल 2020 में ये 13.9 लाख थी, जो 2021 में 14.2 लाख हो गई, जबकि 2022 में इनकी संख्या 14.6 लाख पर पहुंच गई।
Highlights

