झारखंड विधानसभा में एंग्लो इंडियन विधायक का प्रतिनिधित्व समाप्त

रांची: झारखंड विधानसभा के नए सत्र से एक विधायक की कमी हो गई है। इससे पहले झारखंड विधानसभा में विधायकों की संख्या 82 थी, लेकिन अब यह संख्या घटकर 81 हो गई है। यह बदलाव एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रतिनिधित्व के खत्म होने के कारण हुआ है।

दरअसल, झारखंड की विधानसभा में एंग्लो इंडियन समुदाय के किसी व्यक्ति को मनोनीत करने की संवैधानिक व्यवस्था अब समाप्त कर दी गई है। 2019 में झारखंड की पांचवीं विधानसभा के गठन के बाद राज्य सरकार ने ग्लेन जोसेफ ग्लोनॉस के विघटन की अधिसूचना जारी की, जिसके बाद उनका विधानसभा सदस्यता का दर्जा समाप्त हो गया। अब, एंग्लो इंडियन समुदाय का कोई सदस्य झारखंड विधानसभा में नहीं होगा। यह व्यवस्था देश के संविधान में 1952 से चली आ रही थी, जिसे 2019 में समाप्त कर दिया गया।

एंग्लो इंडियन समुदाय का ऐतिहासिक महत्व है। भारत में एंग्लो इंडियन शब्द का पहली बार उल्लेख 1935 में भारत सरकार अधिनियम में हुआ था। यह शब्द उन व्यक्तियों के लिए प्रयोग किया जाता है जिनके पूर्वज यूरोपीय वंश के थे लेकिन जो खुद भारतीय नागरिक हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 366(2) में इसे परिभाषित किया गया है।

भारत में एंग्लो इंडियन समुदाय के प्रतिनिधित्व की व्यवस्था भारतीय संविधान में अनुच्छेद 331 और 333 के तहत की गई थी। इसके तहत, राष्ट्रपति को लोकसभा में दो और राज्यसभा में एक सदस्य को मनोनीत करने का अधिकार था। हालांकि, 2019 में मोदी सरकार ने एंग्लो इंडियन के संसद और राज्य विधानसभाओं में प्रतिनिधित्व को समाप्त करने का फैसला लिया। इस फैसले का कारण एंग्लो इंडियन समुदाय की संख्या में कमी बताया गया।

अब झारखंड विधानसभा में यह व्यवस्था समाप्त हो चुकी है, और एंग्लो इंडियन समुदाय का कोई सदस्य विधानसभा में नहीं होगा।

 

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