पटना : करोड़ों रुपए लगा कर जिन एजेंसियों ने बिहार के शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकारी विद्यालयों में आईसीटी लैब लगाया और फिर पूरी मेहनत और समर्पण से सरकारी विद्यालयों के बच्चों को पढ़ाया। उन सारी एजेंसियों को 31 जनवरी 2025 तक संचालित हो रहे सभी आईसीटी लैब को हटाने का आदेश जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय से निर्गत किया जा चुका है। जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) ने पूर्व में अपर मुख्य सचिव, शिक्षा विभाग के आधार पर एजेंसियों को तीन वर्षों के लिए सरकारी विद्यालयों में आईसीटी लैब लगाने के लिए आदेशित किया था। परंतु सिर्फ एक वर्ष पश्चात ही अपने द्वारा दिए गए पूर्व के आदेश को रद्द करते हुए सारी एजेंसियों को आईसीटी लैब बंद करने का नया आदेश जारी कर दिया है।
जिला शिक्षा पदाधिकारी के कार्यालय से संपर्क करने पर एजेंसियों को प्राप्त जानकारी के अनुसार, जिला शिक्षा पदाधिकारी ने यह आदेश, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, शिक्षा विभाग और बिहार सरकार के आदेश के आलोक में निर्गत किया है। भारी व्याज दर पर पैसा लेकर आईसीटी लैब लगाने वाली एजेंसियों के अनुसार, यह आदेश मानसिक रूप से अत्यंत विचलित करने वाली है। क्योंकि अगर यह आदेश फलीभूत होता है तो एजेंसियां कर्ज लौटने की स्थिति में तो नहीं ही है, बल्कि पूरे परिवार सहित सड़क पर आ जाएंगी। एजेंसियों के द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी से आईसीटी लैब बंद नहीं करने के विनती को लेकर संपर्क करने पर बताया गया कि, वह विभाग द्वारा दिए गए आदेश का पालन कर रहे हैं और एजेंसियों को संबंधित विषय में कोई सहायता नहीं कर सकते हैं।
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आपको बता दें कि मजबूरन एजेंसियों को न्यायालय के शरण में जाना पड़ा और जहां उच्च न्यायालय के द्वारा उक्त मामले को संज्ञान में लेते हुए, निदेशक, माध्यमिक शिक्षा, शिक्षा विभाग और बिहार सरकार के जिस पत्र के द्वारा जिला शिक्षा पदाधिकारी को आईसीटी लैब बंद करने की बात कही गई थी। उस पत्र को फिलहाल में स्थगित कर दिया है। आगे की सुनवाई के लिए सात फरवरी 2025 का समय दिया गया है। फिलहाल यह खबर आईसीटी लैब संचालित करने वाली एजेंसियों के लिए राहत भरी है। माक 646 शिक्षा विभाग के मनमानी एवं गैरजवाबदेह हरकत की वजह सात लाख बच्चों की कम्प्यूटर शिक्षा, पांच हजार से अधिक लोगों के लिए बेरोजगारी एवं तीन सौ छोटी बड़ी कंपनी खत्म होने के कगार पर है। मौके पर अध्यक्ष आलोक रंजन, सचिव शशि प्रकाश, उपाध्यत विजय वर्मा, सक्रिय सदस्य बोध कृष्ण मिश्रा, चिकारा सिंह और निक्कु सिंह मोजूद थे।
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