Buddhist Festival : मैथिली ठाकुर और अभिजीत भट्टाचार्य ने बांधा समां

बोधगया : बौद्ध महोत्सव की तीसरी और अंतिम सांझ हिंदी फिल्मी गीतों और लोक-संगीत की रंगीनियों में डूबी रही। कालचक्र मैदान में हुए इस आयोजन में लोक गायिका मैथिली ठाकुर व बॉलीवुड गायक अभिजीत भट्टाचार्य ने दर्शकों का दिल जीत लिया। अभिजीत भट्टाचार्य ने अपने सुपरहिट गीतों की झड़ी लगाकर समां बांधा। उनकी आवाज ने दर्शकों को बीते दौर की याद दिलाई। वहीं, मैथिली ठाकुर की मखमली आवाज ने हर किसी को मंत्रमुग्ध कर दिया। उन्होंने अपने गीतों में शास्त्रीय संगीत के ‘आलाप’ और ‘बंदिश’ दोनों की अद्भुत प्रस्तुति दी। उनकी लोक-संगीत की प्रस्तुतियों ने बौद्ध महोत्सव को यादगार बना दिया। गीत संगीत का यह सिलसिला देर रात तक गुलाबी ठंड के बीच चलता रहा।

कार्यक्रम के दौरान दर्शक दीर्घा तालियों और उत्साह से गूंज उठी। युवा दर्शकों ने मोबाइल टॉर्च जला कर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। माहौल इतना संगीतमय था कि हर कोई मंत्रमुग्ध नजर आया। इस मौके पर विदेशी कलाकारों ने भी अपनी-अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी प्रस्तुतियां दीं। छह देशों के कलाकारों ने बौद्ध महोत्सव के दौरान अपने देश की लोकसंस्कृति का बेहतरीन प्रदर्शन किया। समारोह के समापन पर बिहार के सहकारिता मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कलाकारों को स्मृति चिह्न भेंट किए। उन्होंने आयोजन को राज्य की सांस्कृतिक धरोहर का प्रतीक बताया।

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गौरतलब है कि 31 जनवरी को शुरू हुए इस महोत्सव में प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं को प्रदर्शित करते स्टॉल भी लगाए गए। कालचक्र मैदान में पांच दिनों तक बौद्ध धर्म और संस्कृति के साथ लोक-संगीत का अद्भुत संगम देखने को मिला। बौद्ध महोत्सव ने न केवल बोधगया की धरती को सुर-लहरियों से सजा दिया, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति का डंका भी बजाया।

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आशीष कुमार की रिपोर्ट

Saffrn

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