MES की निविदाओं में स्टार्टअप्स को शामिल करने के लिए भारतीय स्टार्टअप संघ ने रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को लिखा पत्र

Desk. भारतीय स्टार्टअप संघ (Indian Startup Association) ने सैन्य अभियंत्रण सेवा (MES) की निविदाओं में स्टार्टअप्स को शामिल करने के लिए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ को सुझाव पत्र लिखा है। इसके जरिए संघ ने रक्षा मंत्रालय को एक महत्वपूर्ण नीति सिफारिश भेजते हुए सैन्य अभियंत्रण सेवा (MES) की निविदाओं में नवाचारशील स्टार्टअप्स की भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की है।

संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष रथिन भद्र ने पत्र में बताया कि स्टार्टअप इंडिया और आत्मनिर्भर भारत जैसी पहलों के बावजूद MES की निविदाओं में स्टार्टअप्स को मिलने वाली नीतिगत छूटें लागू नहीं होती हैं। यह स्थिति नवाचार आधारित स्टार्टअप्स की भागीदारी को गंभीर रूप से प्रभावित करती है। विशेषकर उन कार्यों में, जो संवेदनशील नहीं होते, लेकिन तकनीकी रूप से परिवर्तनकारी हो सकते हैं।

प्रमुख सुझाव

1. निविदाओं का वर्गीकरण (Core और Non-Core):

MES की निविदाओं को रणनीतिक (Core) और गैर-रणनीतिक (Non-Core) श्रेणियों में विभाजित कर स्टार्टअप्स को नॉन-कोर कार्यों जैसे– सौर एवं ऊर्जा दक्ष प्रणाली, IOT आधारित निगरानी प्रणाली (जल, वायु, कचरा), लैंडस्केपिंग, डिजिटल दस्तावेजीकरण, GIS मैपिंग, पर्यावरणीय सेवाएं (जल पुनर्भरण, नदी एवं झीलों की सफाई, भूजल संरक्षण, वृक्षारोपण) में भागीदारी का अवसर दिया जाए।

2. स्टार्टअप्स के लिए उप-ठेकेदारी और मेंटरशिप

स्टार्टअप्स को अनुभवी MES ठेकेदारों के अधीन उप-ठेकेदार के रूप में कार्य करने की अनुमति दी जाए, जिससे वे अनुभव प्राप्त कर सकें और भविष्य में स्वतंत्र निविदाओं के लिए पात्र बन सकें।

3. MES स्टार्टअप नवाचार प्रकोष्ठ की स्थापना:

MES के अंतर्गत एक समर्पित नवाचार प्रकोष्ठ बनाया जाए, जो DPIIT के साथ समन्वय कर स्टार्टअप्स के लिए पायलट परियोजनाएं व कार्यक्रम प्रारंभ कर सके।

4. GFR के अंतर्गत रियायतें:

नॉन-कोर कार्यों के लिए DPIIT-पंजीकृत स्टार्टअप्स को निविदा शुल्क (EMD), पूर्व अनुभव और टर्नओवर की आवश्यकताओं में छूट प्रदान की जाए।

5. वार्षिक MES–Startup Innovation Challenge:

एक वार्षिक नवाचार प्रतियोगिता आयोजित कर स्टार्टअप समुदाय से MES की चुनौतियों के लिए अभिनव समाधान आमंत्रित किए जाएं।

संघ का आह्वान:

रथिन भद्र ने कहा, “भारत का स्टार्टअप इकोसिस्टम वैश्विक स्तर पर नवाचार का केंद्र बन चुका है। यदि इन स्टार्टअप्स को MES जैसी संस्थाओं में भागीदारी का अवसर दिया जाए, तो यह रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, नवाचार और पारदर्शिता को नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा।” वहीं भारतीय स्टार्टअप संघ ने रक्षा मंत्रालय से इस दिशा में संवाद स्थापित करने और इस प्रस्ताव को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में लागू करने में पूर्ण सहयोग की पेशकश की है।

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