रांची: राजधानी रांची में साइबर अपराध के कारण ठगी की घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे पुलिस की चिंताएं भी गहराती जा रही हैं। अपराधी अब इतने शातिर हो चुके हैं कि पढ़े-लिखे लोग, वरिष्ठ अधिकारी और पेंशनधारी तक उनके झांसे में आ रहे हैं।
फर्जी कॉल, ईमेल हैकिंग, मोबाइल चोरी और बैंक संबंधी डर दिखाकर अपराधी लोगों के खातों से लाखों रुपये उड़ा ले रहे हैं। वहीं, पुलिस की लगातार चेतावनी और जागरूकता कार्यक्रमों का भी कोई खास असर नहीं दिख रहा है।
पेंशन बंद होने की धमकी, खाते से 3.44 लाख रुपये उड़े
गुमला के पतिया सिकिरिया टोली निवासी मनोहर खड़िया के अनुसार, उन्हें एक कॉल आया जिसमें खुद को “धनबाद के अकाउंट विभाग” का अधिकारी बताया गया। कहा गया कि उनकी पेंशन बंद होने वाली है। उन्होंने व्हाट्सएप पर बैंक डिटेल्स शेयर कर दी। कुछ ही देर बाद उनके खाते से ₹3.44 लाख रुपये निकाल लिये गए।
देवघर में मोबाइल चोरी, खाते से निकाले ₹99,860
रांची के ललगुटया (नगड़ी) निवासी राजकुमार देवघर में बाबा भोलेनाथ पर जल चढ़ाने गए थे। इस दौरान उनका मोबाइल चोरी हो गया। मोबाइल से लिंक बैंक खातों से साइबर अपराधियों ने ₹99,860 रुपये निकाल लिये।

ईमेल हैक कर डीमैट अकाउंट से 3.50 लाख की ठगी
कांके रोड निवासी एक महिला ने शिकायत दर्ज कराई कि उनके डीमैट अकाउंट से ₹3.50 लाख रुपये निकाल लिये गए। जांच में सामने आया कि अपराधियों ने उनका ईमेल हैक कर यह ट्रांजैक्शन किया।
वरिष्ठ निदेशक से फर्जी कॉल के जरिये ₹1.30 लाख की ठगी
अरगोड़ा चौक के पास रहने वाले ओमेश प्रसाद सिन्हा को एक कॉल आया, जिसमें कॉल करने वाले की आवाज उनके सीनियर ऑफिसर से मिलती-जुलती थी। कहा गया कि रिम्स में भर्ती भाई के इलाज के लिए तुरंत पैसे की जरूरत है। ओमेश ने ₹1.30 लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिये। बाद में सीनियर से बात करने पर उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
रांची पुलिस द्वारा साइबर जागरूकता अभियान समय-समय पर चलाए जाते हैं। लोगों को ओटीपी शेयर न करने, फर्जी कॉल से सतर्क रहने और लिंक पर क्लिक न करने की सलाह दी जाती है। बावजूद इसके, लोग जल्दबाज़ी, डर या भावनात्मक दबाव में आकर ठगी का शिकार हो रहे हैं।
पुलिस का कहना है कि अधिकांश मामले में लोग खुद ही जानकारी साझा कर देते हैं, जिससे अपराधियों को रास्ता मिल जाता है।


















