Ranchi- अखिल भारतीय भोजपुरी मगही मैथिली अंगिका मंच के अध्यक्ष कैलाश यादव ने कहा है कि बिहारी और बिहारी भाषाओं पर हमले करने वालों को मुंहतोड़ जबाव दिया जाएगा. भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका भाषा का इतिहास आर्यावर्त और भारत की संस्कृति से जुड़ा है. इन भाषाओं का विरोध करने वालों को रामायण और महाभारत काल का अध्ययन करना चाहिए.
कैलाश यादव ने अखिल भारतीय भोजपुरी मगही मैथिली अंगिका मंच द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि किसी भी हालत में 1932 का खतियान मंजूर नहीं किया जाएगा. स्थानीय नीति का आधार राज्य का स्थापना वर्ष हो या छत्तीसगढ़ और उत्तराखंड के तर्ज पर इसका निर्धारण किया जाय.
कैलाश यादव ने कहा है कि भाषा के नाम पर उन्माद फैलाने की कोशिश बंद हो, लोकतंत्र में सभी को अपनी बात कहने का हक है. लेकिन इसकी आड़ में किसी को किसी जाति, भाषा और उसके राज्य को टारगेट करने का हक नहीं है. भोजपुरी, मगही, अंगिका और मैथिली का विरोध करने वाले राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों को इतिहास का ज्ञान नहीं है, इन भाषाओं का विरोध करने वालों को भोजपुरी, मगही, मैथिली, अंगिका का इतिहास की जानकारी के लिए रामायण और महाभारत काल का अध्ययन करना चाहिए.
झारखंड में डोमिसाइल पार्ट-2 करने की तैयारी
यदि इन भाषाओं के साथ अन्याय हुआ या उपेक्षा करने की कोशिश हुई तो झारखंड एक बार फिर से डोमिसाइल पार्ट 2 की स्थिति में पहुंच जायेगा. सरकार से अपील है कि भाषा के नाम पर लोगों की भावनाओं को भड़काने वाले उपद्रवियों पर कार्रवाई के लिए प्रशासन को सख्त आदेश दिया जाय.
इस अवसर पर राजकिशोर सिंह,सरजू प्रसाद,सुनील पांडेय, चंदेश्वर प्रसाद, प्रमोद मिश्रा,जैनेंद्र राय,सुरेश राय, सुबोध ठाकुर,उपेंद्र नारायण, विष्णु चौबे,शंकर यादव मौजूद रहें.
रिपोर्ट- शाहनवाज
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