रांची: झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य के विभिन्न निचली अदालतों के भवनों की हालत खराब होने पर कड़ी नाराजगी जताई. अदालत ने बोकारो कोर्ट का उदाहरण देते हुए कहा कि नए भवन में महिला न्यायिक पदाधिकारियों के लिए शौचालय ना होना शर्मनाक है. इससे अंदाजा लगाया जा सकता है आखिर कोर्ट में सरकार की ओर से क्या-क्या सुविधाएं दी जाती है. राज्य सरकार अपने बजट का 1 प्रतिशत भी ज्यूडिशरी पर खर्च नहीं करती.
अदालत ने एक रिपोर्ट का जिक्र करते हुए कहा कि उक्त कोर्ट भवन का प्लास्टर गिरता है ऐसे में न्यायिक पदाधिकारी कैसे काम करेंगे, सरकार को इस ओर सोचना चाहिए सिर्फ योजना बनाने से ही काम नहीं चलेगा. सरकार की ओर से दाखिल शपथ पत्र में कहा गया कि केंद्र सरकार अपने हिस्से की राशि उपलब्ध नहीं कराती है इस वजह से अदालतों का काम अधूरा है. इस पर अदालत ने सरकार से कहा कि यह देखना अदालत का काम नहीं है यह देखना सरकार का काम है
रामेश्वर उरांव के निर्वाचन को चुनौती देनी वाली याचिका पर हाईकोर्ट में हुई सुनवाई

