Kharsawan Firing Case:जेएमएम विधायक दशरथ गगराई ने शहीदों की नई पहचान के लिए ज्यूडिशियल कमीशन बनाने की मांग की, सरकार ने जल्द कार्रवाई का दिया भरोसा

खरसावां गोलीकांड के शहीदों की पहचान को लेकर JMM विधायक दशरथ गगराई की न्यायिक जांच आयोग की मांग पर सरकार ने जल्द समिति गठन का आश्वासन दिया।


Kharsawan Firing Case रांची: झारखंड विधानसभा के शीतकालीन सत्र में बुधवार को खरसावां गोलीकांड को लेकर एक बार फिर न्यायिक जांच आयोग की मांग गूंजी। झामुमो विधायक दशरथ गागराई ने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के तहत कहा कि 1 जनवरी 1948 को हुए इस गोलीकांड में आदिवासी समाज के अनगिनत लोग शहीद हुए थे, लेकिन अब तक उनकी पूरी तरह पहचान नहीं हो सकी है।

उन्होंने बताया कि गृह विभाग के निर्देश पर 2015 में सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन ने एक समिति गठन की थी। समिति ने विस्तृत जांच के बाद केवल दो व्यक्तियों — स्व. डोलो सो और स्व. सिंग्र बोदरा — को शहीद के रूप में चिन्हित किया था और सरकार ने उनके परिजनों को अनुग्रह राशि दी। हालांकि समिति ने अपनी रिपोर्ट में यह स्पष्ट लिखा कि घटना की सच्चाई सामने लाने और सभी शहीदों की पहचान के लिए एक न्यायिक आयोग आवश्यक है।


Key Highlights

  • विधायक दशरथ गागराई ने खरसावां गोलीकांड के शहीदों की पहचान के लिए न्यायिक जांच आयोग गठन की मांग उठाई।

  • 2015 में बनी जिला स्तरीय समिति ने केवल दो शहीदों की पहचान की थी और व्यापक जांच की सिफारिश की थी।

  • मंत्री ने माना कि खरसावां गोलीकांड स्वतंत्र भारत का दूसरा जलियांवाला बाग जैसा दर्दनाक अध्याय है।

  • सरकार ने उच्च स्तरीय समिति या न्यायिक आयोग गठित करने पर सहमति जताई।

  • मंत्री ने कहा कि आयोग गठन की प्रक्रिया “अति शीघ्र” शुरू की जाएगी, बजट सत्र से पहले पूरा करने का प्रयास।


विधायक गागराई ने कहा कि खरसावां गोलीकांड स्वतंत्र भारत का पहला सबसे बड़ा नरसंहार माना जाता है, जिसे कोल्हान क्षेत्र में आज भी शोक दिवस के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि आज तक किसी सरकारी दस्तावेज में पीड़ितों की वास्तविक संख्या दर्ज नहीं है, जबकि स्थानीय लोगों की मानें तो शवों से भरे कुएं, पहाड़ों में फेंके गए घायल और हजारों की भीड़ इस त्रासदी के प्रमाण हैं।

Kharsawan Firing Case: सरकार का जवाब: “अति शीघ्र बनेगी उच्च स्तरीय समिति”

गृह विभाग की ओर से जवाब देते हुए मंत्री ने कहा कि खरसावां गोलीकांड न सिर्फ झारखंड बल्कि पूरे देश के आदिवासी इतिहास का प्रतीक है। उन्होंने स्वीकार किया कि 2015 की समिति ने उड़ीसा और पश्चिम बंगाल तक जांच की थी, मगर केवल दो शहीदों की पहचान हो सकी। समिति ने यह भी स्पष्ट किया था कि लाखों लोग उस सभा में मौजूद थे और वास्तविक शहीदों की संख्या का आकलन व्यापक स्तर पर ही संभव है।

Kharsawan Firing Case:

मंत्री ने आश्वासन दिया कि सरकार उच्च स्तरीय या न्यायिक जांच आयोग के गठन पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि आयोग गठन की प्रक्रिया “अति शीघ्र” शुरू की जाएगी, और यदि संभव हुआ तो अगले बजट सत्र से पहले भी यह कदम उठाया जा सकता है।

Kharsawan Firing Case:

विधायक गागराई ने कहा कि खरसावां की धरती शहीदों के बलिदान से पवित्र है और राज्य का दायित्व है कि सभी शहीदों की आधिकारिक पहचान की जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि सरकार बजट सत्र से पहले आयोग की घोषणा कर देगी, ताकि उनके क्षेत्र की यह दशकों पुरानी मांग पूरी हो सके।

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