बोकारो : बोकारो के प्रसेनजीत कुमार अनोखे मेडिसिनल प्लांट्स उगाने के कारण चर्चा में है। इस युवा ने अपनी सोच, मेहनत और जूनून से वह कर दिखाया है, जिसे देखकर एग्रीकल्चर फील्ड के कई महारथी हैरान हैं।
दातु गांव के रहने वाले प्रसेनजीत कुमार ने झारखंड राय विश्वविद्यालय से एग्रीकल्चर की पढ़ाई की है। प्रसेनजीत नोनी, मेडिसिनल प्लांट उगा कर सबको अचंभित कर दिया है । नोनी जिसे Indian Mulberry भी कहा जाता है। ये सिर्फ कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों में ही उगायी जाती है, क्योंकि नोनी के बीजों को अंकुरित होने के लिए ट्रॉपिकल तापमान की ज़रूरत होती है। लेकिन, प्रसेनजीत ने अपने ज्ञान और मेहनत से न सिर्फ इसे उगाया पर अब इसकी फार्मिंग करने जा रहे है।
प्रसेनजीत ने 2019 में अपनी एग्रीकल्चर कि पढ़ाई खत्म कर सबसे पहले स्टेविया (मीठी तुलसी) पर काम किया और उस में सफलता भी हासिल की। प्रसेनजित, जीवनबोध एग्रोटेक के संस्थापक है। और अब नोनी पर फोकस कर रहे है। नोनी का उपयोग आयुर्वेदिक उपचार के लिए हजारों वर्षों से किया जा रहा है। यह फल, अमीनो एसिड, विटामिन सी और पेक्टिन सहित, कई पोषक तत्वों से भरा होता है। साथ ही ट्यूमर और कैंसर सेल्स को बढ़ने से रोकने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है।
प्रसेनजीत की माँ एक आयुर्वेदिक चिकित्सक हैं और ट्रेडिशनल रेसिपीज़ से बीमारियों का इलाज करती हैं। उनकी माँ ने ही बताया की नोनी बिमारीयों के लिए संजीवनी का काम करता है। उसके बाद ही प्रसेनजीत ने नोनी को उगाने का फैसला किया।
ये काम इतना आसान नहीं था, इसे उगाने के लिए प्रसेनजीत ने कॉलेज के प्रोफेसरों की भी मदद ली। और अब नोनी की फार्रमिंग कर एक नया अध्याय शुरु कर रहे हैं।


