बांका : बांका जिले के अमरपुर प्रखंड के लक्ष्मीपुर चिरैया पंचायत से इस वक्त एक बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां लौंगांय गांव के किसानों ने पंचायत के पैक्स अध्यक्ष पर गंभीर आरोप लगाए हैं। धान खरीद में अनियमितता और मनमानी का आरोप लगाते हुए रविवार को दर्जनों किसानों ने गांव में प्रदर्शन किया और पैक्स अध्यक्ष के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।
पैक्स अध्यक्ष किसानों का धान नहीं खरीद रहे हैं – किसान
प्रदर्शन कर रहे किसानों का कहना है कि पैक्स अध्यक्ष किसानों का धान नहीं खरीद रहे हैं और धान खरीद के नाम पर प्रति क्विंटल 10 से 15 किलो तक कमीशन की मांग की जा रही है। किसानों का यह भी आरोप है कि बिचौलियों का धान खरीदकर पैक्स अध्यक्ष गोदाम भर रहे हैं जबकि असली किसानों का धान उनके घरों में पड़ा सड़ रहा है।
पैक्स में 15 क्विंटल धान दिया था लेकिन भुगतान केवल 13.5 क्विंटल का किया गया – किसान अजय कुमार
किसान अजय कुमार ने बताया कि उन्होंने पैक्स में 15 क्विंटल धान दिया था लेकिन भुगतान केवल 13.5 क्विंटल का किया गया यानी डेढ़ क्विंटल धान की कटौती कर ली गई। आक्रोशित किसानों ने जिला पदाधिकारी, जिला सहकारिता विभाग, कॉपरेटिव बैंक के अध्यक्ष और अमरपुर बीसीओ को लिखित आवेदन देकर मामले की निष्पक्ष जांच और किसानों का धान शत-प्रतिशत दर पर खरीदने की मांग की है।

‘धान खरीद से वंचित किसान मजबूरन अपने धान को बीच सड़क पर रखकर आग लगाने जैसा कठोर कदम उठाने पर मजबूर होंगे’
किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो धान खरीद से वंचित किसान मजबूरन अपने धान को बीच सड़क पर रखकर आग लगाने जैसा कठोर कदम उठाने पर मजबूर होंगे। वहीं इस पूरे मामले पर लक्ष्मीपुर चिरैया पंचायत के पैक्स अध्यक्ष सुधीर सिंह ने सभी आरोपों को बेबुनियाद और निराधार बताया है। पैक्स अध्यक्ष का कहना है कि उन्हें विभाग द्वारा 4000 क्विंटल धान खरीद का लक्ष्य मिला है जिसमें से अब तक 1489 क्विंटल धान की खरीद की जा चुकी है।
धान नहीं उठाए जाने के कारण पिछले 15 दिनों से धान खरीद अस्थायी रूप से बंद है
उन्होंने बताया कि सीसी नहीं रहने और मिलर द्वारा धान नहीं उठाए जाने के कारण पिछले 15 दिनों से धान खरीद अस्थायी रूप से बंद है। उम्मीद है कि एक-दो सप्ताह में समस्या का समाधान होते ही फिर से किसानों से धान की खरीद शुरू कर दी जाएगी। पैक्स अध्यक्ष ने यह भी कहा कि पंचायत के किसान उनके परिवार की तरह हैं और किसानों की फसल को शत-प्रतिशत दर पर खरीदना उनकी पहली प्राथमिकता है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस मामले को कितनी गंभीरता से लेता है और किसानों को कब तक न्याय मिल पाता है।
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दीपक कुमार की रिपोर्ट


