नगर निकाय चुनाव में पहली बार ट्रिपल टेस्ट लागू, 13 वार्ड ओबीसी के लिए आरक्षित। नए आरक्षण रोस्टर से बदली चुनावी रणनीति और बढ़ी सियासी हलचल।
Municipal elections with the triple test रांची: राज्य में होने जा रहे नगर निकाय चुनाव इस बार कई मायनों में अलग हैं। पहली बार ट्रिपल टेस्ट के आधार पर चुनाव कराए जा रहे हैं, जिसके तहत 13 वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित किए गए हैं। इसी प्रक्रिया के तहत जिला प्रशासन ने वार्डों का नया आरक्षण रोस्टर जारी किया है, जिसने स्थानीय राजनीति की तस्वीर बदल दी है।
Municipal elections with the triple test: नए आरक्षण रोस्टर से बदले चुनावी समीकरण
नए आरक्षण रोस्टर के लागू होते ही कई निवर्तमान वार्ड पार्षदों के सामने नई चुनौती खड़ी हो गई है। कई ऐसे वार्ड, जो पहले सामान्य थे, अब ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित कर दिए गए हैं, वहीं कुछ मौजूदा पार्षदों के वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हो गए हैं। इसका सीधा असर यह पड़ा है कि कई पुराने पार्षदों को इस बार अपना वार्ड छोड़कर दूसरे वार्ड से चुनाव लड़ने की तैयारी करनी पड़ रही है।
Key Highlights
नगर निकाय चुनाव पहली बार ट्रिपल टेस्ट के आधार पर
13 वार्ड ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित
नए आरक्षण रोस्टर से कई वार्डों की श्रेणी बदली
वार्ड 34 से तीन निवर्तमान पार्षदों की दावेदारी
उप-महापौर को भी बदलना पड़ा चुनावी वार्ड
Municipal elections with the triple test: वार्ड 34 बना सियासी अखाड़ा
नए परिसीमन और आरक्षण के बाद वार्ड नंबर 34 सबसे अधिक चर्चा में है। इस वार्ड से इस बार तीन निवर्तमान वार्ड पार्षद चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।
वार्ड 34 के पूर्व पार्षद विनोद सिंह पहले ही यहां से अपनी दावेदारी जता चुके हैं। इसके अलावा, वार्ड 27 के पूर्व पार्षद ओमप्रकाश भी अब इसी वार्ड से चुनाव लड़ेंगे, क्योंकि वार्ड 27 इस बार ओबीसी टू महिला के लिए आरक्षित हो गया है। वहीं वार्ड 26 के निवर्तमान पार्षद अरुण कुमार झा भी आरक्षण बदलने के कारण वार्ड 34 से ही किस्मत आजमाने जा रहे हैं। तीन-तीन अनुभवी चेहरों के उतरने से वार्ड 34 में मुकाबला दिलचस्प हो गया है।
Municipal elections with the triple test: उप-महापौर को भी बदलना पड़ा वार्ड
आरक्षण रोस्टर का असर सिर्फ वार्ड पार्षदों तक सीमित नहीं रहा। निवर्तमान उप-महापौर संजीव विजयवर्गीय को भी इस बार अपना पुराना वार्ड छोड़ना पड़ रहा है। उप-महापौर का चुनाव पार्षदों द्वारा किया जाता है, ऐसे में उनका पार्षद बनना जरूरी है। नए हालात में वे वार्ड चार या वार्ड 18 से चुनावी मैदान में उतर सकते हैं।
वार्ड चार से चुनाव लड़ने पर उनका सामना पूर्व वार्ड पार्षद हुस्नाआरा से होगा, जबकि वार्ड 18 में सांसद महुआ माजी के पुत्र सोमवित माजी के संभावित उम्मीदवार होने की चर्चा है।
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