रांची के धुर्वा से लापता अंश और अंशिका 12 दिन बाद रामगढ़ के चितरपुर से बरामद हुए। आरोपी पति पत्नी बनकर बच्चों को छुपा रहे थे।
Human Trafficking Jharkhand : रांची के धुर्वा इलाके से लापता हुए मासूम भाई बहन अंश और अंशिका को आखिरकार पुलिस ने सकुशल बरामद कर लिया है। करीब 12 दिनों तक चले सघन तलाशी अभियान के बाद दोनों बच्चों को रामगढ़ जिले के चितरपुर गांव से ढूंढ निकाला गया। पुलिस को इस बड़ी सफलता गुप्त सूचना के आधार पर मिली, जिसके बाद इलाके में छापेमारी कर बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जो खुद को पति पत्नी बताकर दोनों बच्चों को अपने साथ रखे हुए थे।
बच्चों की बरामदगी के बाद पुलिस ने उनके परिजनों को तुरंत सूचना दी है और दोनों को रांची लाया जा रहा है। बाल संरक्षण आयोग भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए था और लगातार प्रशासन से रिपोर्ट मांगी जा रही थी। पुलिस अब इस पूरे अपहरण कांड के पीछे की साजिश और नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है।
गुप्त सूचना के आधार पर चितरपुर से अंश और अंशिका की बरामदगी
आरोपी खुद को पति पत्नी बताकर बच्चों को अपना बता रहे थे
बिना सही सत्यापन के किराए के मकान में छुपाए गए थे दोनों बच्चे
पुलिस की सतर्कता से बड़ी साजिश नाकाम
गांव में बाहरी लोगों के सत्यापन की मांग तेज
Human Trafficking Jharkhand: गुप्त सूचना से खुला चितरपुर का ठिकाना
पुलिस को सूचना मिली थी कि रामगढ़ के चितरपुर इलाके में एक दंपति दो छोटे बच्चों के साथ किराए के मकान में रह रहा है। जब पुलिस टीम वहां पहुंची और पूछताछ की तो मामला संदिग्ध पाया गया। बच्चों के व्यवहार और आरोपियों के जवाबों में कई विरोधाभास सामने आए, जिसके बाद सख्ती से पूछताछ की गई। इसी दौरान यह पुष्टि हुई कि दोनों मासूम बच्चे वही अंश और अंशिका हैं, जिनकी तलाश पूरे झारखंड में की जा रही थी। इसके बाद पुलिस ने तुरंत दोनों बच्चों को अपने संरक्षण में ले लिया।
Human Trafficking Jharkhand: पति पत्नी बनकर बच्चों को छुपा रहे थे आरोपी
स्थानीय लोगों और मकान मालिक के अनुसार आरोपी खुद को पति पत्नी बताकर बच्चों को अपना बताया करते थे। उन्होंने दावा किया था कि वे बिहार से आए हैं और वहां उनका घर टूट गया है, इसलिए वे चितरपुर में एक महीने के लिए किराए पर रहना चाहते हैं। मकान मालिक को उन्होंने आधार कार्ड भी दिखाया था, लेकिन उसकी कोई कॉपी नहीं दी गई थी। इसी बहाने उन्होंने मकान हासिल कर लिया और बच्चों को वहां छुपाकर रखा।
पुलिस की सख्ती और लगातार चल रही तलाश के चलते आरोपी बच्चों को लेकर कहीं बाहर नहीं जा सके। माना जा रहा है कि वे मामला शांत होने का इंतजार कर रहे थे, ताकि बाद में दोनों मासूमों को किसी दूसरे स्थान पर ले जाया जा सके और पहचान छुपाई जा सके।
Human Trafficking Jharkhand: स्थानीय लोगों ने उठाए सुरक्षा और सत्यापन पर सवाल
चितरपुर गांव में इस घटना के बाद गहरी चिंता और आक्रोश का माहौल है। ग्राम पंचायत के मुखिया और ग्रामीणों का कहना है कि इलाके में कई बाहरी लोग बिना किसी ठोस पहचान और सत्यापन के रह रहे हैं, जो सुरक्षा के लिहाज से गंभीर खतरा बन चुका है। लोगों का कहना है कि अगर समय रहते मकान किराए पर देने से पहले कागजातों की जांच होती तो यह घटना रोकी जा सकती थी।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांव और आसपास के क्षेत्रों में रह रहे सभी बाहरी लोगों का सत्यापन कराया जाए और जो लोग अवैध रूप से रह रहे हैं, उन पर सख्त कार्रवाई हो। पुलिस प्रशासन ने भी भरोसा दिलाया है कि पूरे इलाके में अब विशेष सत्यापन अभियान चलाया जाएगा ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं को रोका जा सके।
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