Chaibasa Naxal Update: पश्चिमी सिंहभूम अब ‘Most Affected’ सूची से बाहर, MHA Report 2026 में बड़ा बदलाव

Chaibasa Naxal Update: गृह मंत्रालय की 2026 रिपोर्ट में पश्चिमी सिंहभूम अति नक्सल प्रभावित सूची से बाहर। अब डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न में शामिल, तीन जिले लीगेसी श्रेणी में।


Chaibasa Naxal Update : झारखंड के पश्चिमी सिंहभूम जिला को लेकर बड़ी राहत की खबर है। केंद्र सरकार की नई रिपोर्ट में यह जिला अब अति नक्सल प्रभावित जिलों की सूची से बाहर हो गया है। 9 फरवरी 2026 को जारी केंद्रीय गृह मंत्रालय की रिपोर्ट में नक्सल प्रभावित जिलों का नया श्रेणीकरण किया गया है।

नई सूची के अनुसार पश्चिमी सिंहभूम को अब सिर्फ सामान्य नक्सल प्रभावित जिला यानी डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न की श्रेणी में रखा गया है। पहले यह देश के पांच राज्यों के 12 अति नक्सल प्रभावित जिलों में शामिल था।

 गृह मंत्रालय की नई रिपोर्ट में बदली तस्वीर

रिपोर्ट के अनुसार अब अति नक्सल प्रभावित श्रेणी में सिर्फ तीन जिले बचे हैं, जो सभी छत्तीसगढ़ के बीजापुर, नारायणपुर और सुकमा हैं। डिस्ट्रिक्ट ऑफ कंसर्न श्रेणी में छत्तीसगढ़ का कांकेर जिला शामिल है।

झारखंड के लातेहार, बोकारो और चतरा को लीगेसी जिलों की सूची में रखा गया है। लीगेसी जिले वे हैं जहां वर्तमान में नक्सल गतिविधियां लगभग समाप्त हो चुकी हैं। इन जिलों में विकास योजनाओं को बढ़ावा देने और सुरक्षाबलों को सहायता देने के लिए एसआरई योजना जारी रहेगी।

  • पश्चिमी सिंहभूम अति नक्सल प्रभावित सूची से बाहर

  • गृह मंत्रालय की 9 फरवरी 2026 की रिपोर्ट में बदलाव

  • अब केवल तीन जिले देश में अति प्रभावित श्रेणी में

  • झारखंड के तीन जिले लीगेसी श्रेणी में शामिल

  • पश्चिमी सिंहभूम में सक्रिय नक्सलियों की संख्या लगभग 50

पश्चिमी सिंहभूम में जमीनी स्थिति

पश्चिमी सिंहभूम जिले में पहले 32 थाना और ओपी क्षेत्र नक्सल प्रभावित थे। वर्तमान में स्थिति काफी बदली है और सिर्फ छोटानागरा तथा जरायकेला थाना क्षेत्र के कुछ इलाकों में ही नक्सली गतिविधियां सिमटी हैं।

सूत्रों के अनुसार जिले में अब लगभग 50 नक्सली सक्रिय बचे हैं। इनमें पोलित ब्यूरो सदस्य मिसिर बेसरा, जिस पर एक करोड़ रुपये का इनाम है, प्रमुख नामों में शामिल है। इसके अलावा केंद्रीय कमेटी का सदस्य असीम मंडल भी सक्रिय बताया गया है।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों के लॉजिस्टिक, हथियार और लेवी से जुड़े सभी सप्लाई रूट बंद कर दिए गए हैं। लगातार अभियान के कारण नक्सली जंगलों में सिमटने को मजबूर हैं और बाहरी गतिविधियां लगभग ठप हो चुकी हैं।

नौ वर्षों में बड़ी गिरावट

आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2016 में झारखंड के 22 जिले नक्सल प्रभावित थे। वर्ष 2018 में यह संख्या 19, वर्ष 2021 में 16 और वर्ष 2024 में घटकर 11 रह गई।

पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु ने कहा कि संयुक्त अभियान लगातार जारी है और जल्द ही प्रभावित थाना क्षेत्रों को भी नक्सल मुक्त करने का लक्ष्य है। सुरक्षा बलों की सख्ती और विकास योजनाओं के विस्तार से स्थिति में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

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