पटना : बिहार सरकार के शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि राज्य में विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में सरकार कार्य कर रही है। ताकि उन्हें उच्च शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़े। इसमें सभी का सहयोग जरूरी है। शिक्षा मंत्री मंगलवार को उच्च शिक्षा विभाग के तत्वावधान में सात निश्चय-3 के तहत ‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस को विकसित करने के परामर्श’ विषय पर आयोजित एक दिवसीय कार्यशाला को संबोधित कर रहे थे। इसके पूर्व उन्होंने दीप प्रज्जवलित कर कार्यशाला का उद्घाटन किया।
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा- यह सेमिनार बिहार के भविष्य और उच्च शिक्षा में बेहतर साबित होगा
शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने कहा कि यह सेमिनार बिहार के भविष्य और उच्च शिक्षा में बेहतर साबित होगा। यहां विचारों का आदान-प्रदान ही नहीं बल्कि ठोस सुझाव भी दिए जाएंगे, ताकि आगे की पीढ़ी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस से बेनफिट उठा सकें। उन्होंने कहा कि शोध को प्रोत्साहन कैसे करना है, गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा और स्टार्टप कैसे किया जाएगा इस पर भी विचार करेंगे। हमारे पास शिक्षा के क्षेत्र में पौराणिक धरोहरे हैं जैसे नालंदा विश्वविद्वालय, विक्रमशिला विश्वविद्यालय आदि। हमें तय करना है कि जो हमारे संस्थान है वह राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रमुख स्थान हासिल करें। यह बहुत बड़ी यात्रा है।

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कारण काफी विकास हुआ है – शिक्षा मंत्री
शिक्षा मंत्री ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कारण काफी विकास हुआ है। 2005 में शिक्षा का बजट 4400 करोड़ था वह आज 68 हजार करोड़ से अधिक हो गया है। राज्य में 76 हजार स्कूल हैं, जिसमें एक करोड़ 76 लाख विद्यार्थी है। राज्य में एक करोड़ 30 लाख बच्चों को प्रतिदिन एमडीएम दिया जाता है। वर्ष 2001 में महिला साक्षरता दर 23 से 24 फीसदी था जो वर्ष 2024 में बढ़कर 74 फीसदी हो गया है। राज्य में पहले पांच विश्वविद्यालय थे आज उनकी संख्या 14 हो गई है। जिसमें 20 लाख से अधिक विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यार्थियों को गुणवत्ता पूर्ण शिक्षा की जरूरत है।

‘सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सेटअप करेंगे, जिसके लिए यह कार्यशाला आयोजित किया गया है’
उन्होंने कहा कि इसके लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस सेटअप करेंगे, जिसके लिए यह कार्यशाला आयोजित किया गया है। हम डिजिटल वर्ल्ड में जी रहे हैं जो एआई परिदृष्य से प्रभावित है। यह विश्वविद्यालयों के परिदृष्य और पढ़ाई को बदल देगा। प्रारंभिक चरण में राज्य में चिन्हित कॉलेजों को सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में विकसित किया जाएगा जहां उच्च गुणवत्ता एआई तकनीक, कौशल, बेहतर भवन, आधुनिक प्रयोगशाला, डिजिटल शिक्षा एवं शोध की सुविधाएं उपलब्ध रहेगी। शिक्षा मंत्री ने सभी कुलपति से आग्रह करते हुए कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के रूप में जो कॉलेज चयनित होंगे उसमें अच्छे शिक्षक उपलब्ध कराया जाए। हम उम्मीद करते हैं कि इस कार्यशाला में सकारात्मक चीजे निकलकर आएंगे।

पटना के 3 कॉलेजों को छोड़कर राज्य के किसी भी कॉलेज का नैक से ग्रेड नहीं मिला है – विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह
वहीं विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह ने कहा कि पटना के तीन कॉलेजों को छोड़कर राज्य के किसी भी कॉलेज का नैक से ग्रेड नहीं मिला है। यह काफी चिंतनीय है। इसपर ध्यान देना होगा और शिक्षकों का भी ग्रेड होना चाहिए। राज्य के सभी वित पोषित कॉलेजों को भी नैक से जोड़ा जाए। मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है। जिसके कारण विद्यालयों में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ी है। उच्च शिक्षा में चुनौतियों को देखते हुए अलग उच्च शिक्षा बनाया गया है, ताकि राज्य में उच्च शिक्षा की स्थिति बेहतर हो सके।

मुख्यमंत्री के सचिव डॉ. चंद्रशेखर सिंह ने कहा- शिक्षा के क्षेत्र में काफी बदलाव आया है
उन्होंने पुराने संस्थानों की गरिमा को वापस लाने का प्रयास करने की अपील की। उच्च शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने कहा कि सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए दो चरणों में कॉलेजों का चयन किया गया है। शिक्षा को बेहतर बनाना चुनौती है जिसे स्वीकार कर कार्य करना होगा। सभी के प्रयास से हमारे शैक्षणिक व्यवस्था बेहतर हो जाएगी। आगत अतिथियों का स्वागत निदेशक डॉ. एनके अग्रवाल ने की। इस मौके पर सभी विश्वविद्यालयों के कुलपति, शिक्षक और शिक्षिकाएं मौजूद थीं।
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