झारखंड सरकार ने महालेखाकार को आदिवासी जमीन हस्तांतरण के दस्तावेज देने से किया इनकार, सीएनटी एक्ट के तहत बताया कानूनी कारण
Jharkhand Land Law Update रांची: झारखंड सरकार ने आदिवासी जमीन के हस्तांतरण से जुड़े अहम दस्तावेज महालेखाकार (एजी) को देने से इनकार कर दिया है। सरकार का कहना है कि इस तरह के अर्द्ध-न्यायिक रिकॉर्ड का ऑडिट करने का अधिकार महालेखाकार के पास नहीं है, इसलिए दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराए जा सकते।
राज्य सरकार ने यह निर्णय विधि विभाग से प्राप्त कानूनी राय के आधार पर लिया है।
Jharkhand Land Law Update:विधि विभाग की राय के बाद लिया गया फैसला
राज्य सरकार ने इस मामले में पहले विधि विभाग से परामर्श मांगा था। विधि विभाग ने स्पष्ट किया कि छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम (सीएनटी एक्ट) की धारा 49 के तहत सक्षम पदाधिकारियों द्वारा पारित आदेश अर्द्ध-न्यायिक प्रक्रिया के अंतर्गत आते हैं।
ऐसे में इन मामलों का ऑडिट महालेखाकार द्वारा नहीं किया जा सकता, क्योंकि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता। इसी आधार पर सरकार ने दस्तावेज देने से इनकार किया।
Key Highlights:
झारखंड सरकार ने महालेखाकार को दस्तावेज देने से किया इनकार
सीएनटी एक्ट की धारा 49 को बताया प्रमुख आधार
विधि विभाग की राय के बाद लिया गया निर्णय
ट्राइबल लैंड मैनेजमेंट ऑडिट के लिए मांगे गए थे दस्तावेज
सरकार ने कहा, सीमित मामलों में ही है ऑडिट का अधिकार
Jharkhand Land Law Update:महालेखाकार ने मांगे थे ट्राइबल लैंड से जुड़े दस्तावेज
बताया जाता है कि झारखंड के महालेखाकार ने राज्य सरकार को पत्र लिखकर रांची जिले में ट्राइबल लैंड मैनेजमेंट के परफॉर्मेंस ऑडिट के लिए आवश्यक दस्तावेजों की मांग की थी।
उन्होंने आदिवासी जमीन हस्तांतरण से जुड़े मामलों की जांच के लिए संबंधित फाइलों की जरूरत जताई थी, ताकि पूरे मामले का आकलन किया जा सके।
Jharkhand Land Law Update:सीमित मामलों में ही ऑडिट का अधिकार
राज्य सरकार का कहना है कि संसद से पारित प्रावधानों के अनुसार महालेखाकार को केवल पांच विशेष मामलों में ही ऑडिट करने का अधिकार प्राप्त है।
ऐसे में अर्द्ध-न्यायिक प्रकृति के जमीन संबंधी मामलों को इस दायरे से बाहर माना गया है। इस निर्णय के बाद प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर इस मुद्दे को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
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