झारखंड टेंडर कमीशन घोटाले में ईडी ने पांचवीं चार्जशीट दाखिल की, 36 आरोपी, 90 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग का खुलासा।
Jharkhand Tender Scam Update रांची: प्रवर्तन निदेशालय ने झारखंड के ग्रामीण कार्य विभाग में सामने आए करोड़ों के टेंडर कमीशन घोटाला मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम के तहत पांचवीं पूरक अभियोजन शिकायत दाखिल की है। इस नई चार्जशीट में 14 और अधिकारियों व इंजीनियरों को आरोपी बनाया गया है, जिसके बाद कुल आरोपियों की संख्या बढ़कर 36 हो गई है।
Jharkhand Tender Scam Update: 14 नए अधिकारी-इंजीनियर बने आरोपी
ईडी द्वारा दायर पांचवीं पूरक अभियोजन शिकायत में ग्रामीण कार्य विभाग, ग्रामीण विकास विशेष क्षेत्र और झारखंड राज्य ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकार से जुड़े 14 अधिकारियों को आरोपी बनाया गया है। इनमें मुख्य इंजीनियर, कार्यपालक इंजीनियर और सहायक इंजीनियर स्तर के कई अधिकारी शामिल हैं, जिनमें कुछ सेवानिवृत्त अधिकारी भी हैं।
इनमें प्रमुख रूप से सिंगराई टुटी, राजीव लोचन, सुरेंद्र कुमार, प्रमोद कुमार, संतोष कुमार, अजय कुमार, अजय तिर्की, राजकुमार टोप्पो, अशोक कुमार गुप्ता, सिद्धांत कुमार, अनिल कुमार, राम पुकार राम, रमेश ओझा और उमेश कुमार के नाम शामिल हैं।
Key Highlights:
ईडी ने पांचवीं पूरक चार्जशीट दाखिल की
14 नए आरोपियों के जुड़ने से कुल संख्या 36 हुई
टेंडर में 3 प्रतिशत कमीशन लेने का खुलासा
3048 करोड़ के टेंडर में 90 करोड़ की मनी लॉन्ड्रिंग
झारखंड, दिल्ली और बिहार में 52 जगह छापेमारी
Jharkhand Tender Scam Update: विभाग में चलता था कमीशन का संगठित रैकेट
ईडी की जांच में खुलासा हुआ है कि संबंधित विभागों के भीतर एक सुनियोजित रिश्वत तंत्र संचालित किया जा रहा था। टेंडर आवंटन के बदले ठेकेदारों से कुल राशि का करीब तीन प्रतिशत कमीशन लिया जाता था।
इस कमीशन का बंटवारा पद के अनुसार तय था। जांच के अनुसार 1.35 प्रतिशत हिस्सा तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम को उनके निजी सचिव संजीव कुमार लाल के माध्यम से पहुंचता था। वहीं 0.65 से 1 प्रतिशत कमीशन विभागीय सचिव को दिया जाता था, जबकि बाकी रकम मुख्य इंजीनियरों और उनके अधीनस्थ अधिकारियों में बांटी जाती थी।
Jharkhand Tender Scam Update: 3048 करोड़ के टेंडर में 90 करोड़ से ज्यादा की मनी लॉन्ड्रिंग
ईडी के अनुसार करीब 3,048 करोड़ रुपये के टेंडर आवंटन के मुकाबले 90 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध संपत्ति अर्जित की गई है। इस मामले में एजेंसी पहले ही झारखंड, दिल्ली और बिहार में 52 स्थानों पर छापेमारी कर चुकी है।
जांच एजेंसी अब इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और आने वाले समय में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।


